दिल्ली की दिवाली पर संकट: रैली टालने के लिए सोनिया गांधी के दरबार में पहुंचे व्यापारी
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली मेगा रैली को टालने की गुहार लगाई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के इस पीक सीजन में रैली उनके रोजगार पर सीधा प्रहार करेगी।

12,000 करोड़ के कारोबार पर खतरे के बादल CTI ने चेतावनी दी है कि यदि रैली तय समय पर होती है, तो इसका असर केवल 1 नवंबर को नहीं, बल्कि 31 अक्टूबर से ही शुरू हो जाएगा। व्यापारियों का अनुमान है कि इससे दिल्ली के 20 बड़े होलसेल और रिटेल बाजारों में रोजाना होने वाला 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता है।

ट्रैफिक और पार्किंग का बड़ा संकट व्यापारियों ने तर्क दिया है कि रामलीला मैदान के आसपास 20 बड़े बाजार हैं। रैली में 10 लाख लोगों के आने और 15,000 से 20,000 गाड़ियों के जुटने से सेंट्रल दिल्ली में भारी जाम लग जाएगा। CTI के अनुसार, रामलीला मैदान में बसों और गाड़ियों की पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे आम लोगों और दुकानदारों का हाल बेहाल हो जाएगा।

31 अक्टूबर से ही लॉकडाउन जैसे हालात पत्र में उल्लेख किया गया है कि 31 अक्टूबर की शाम से ही दिल्ली की सीमाओं (सिंधु, टिकरी, गाजीपुर) पर बसों का दबाव बढ़ जाएगा और मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग शुरू हो जाएगी। ट्रांसपोर्टरों ने पहले ही सामान ढोने से मना करना शुरू कर दिया है। व्यापारियों को डर है कि धनतेरस और दिवाली की खरीदारी के लिए आने वाले लाखों ग्राहक जाम के डर से बाजारों का रुख नहीं करेंगे।

CTI की सोनिया गांधी से दो प्रमुख मांगें

  1. तारीख बदलें: रैली को दिवाली के बाद (10-11 नवंबर के बाद) आयोजित किया जाए ताकि धनतेरस और दीपावली के कारोबार पर कोई असर न पड़े।
  2. स्थान बदलें: यदि रैली टालना संभव न हो, तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में शिफ्ट किया जाए, जहां पर्याप्त पार्किंग की सुविधा मौजूद है।

राहुल गांधी ने नहीं सुनी, अब सोनिया जी ही आखिरी उम्मीद CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने स्पष्ट किया है कि वे रैली का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि अपनी रोजी-रोटी बचाने की विनती कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी व्यापारियों ने राहुल गांधी से रैली टालने की गुहार लगाई थी, जिसे ठुकरा दिया गया था। अब दिल्ली के 20 लाख व्यापारियों की नजरें सोनिया गांधी के फैसले पर टिकी हैं।

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