पाकिस्तान का नकाब उतरा: हिंदुओं की आबादी 14% से 2% क्यों हुई? सामने आई साजिश की पूरी सच्चाई
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पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार पर एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ब्रिटिश संगठन इनसाइट यूके (INSIGHT UK) ने ब्रिटेन की संसद में ऑल-पार्टी संसदीय समूह (APPG) के सामने द रिलिजियस परसिक्यूशन ऑफ हिंदूज इन पाकिस्तान शीर्षक से यह दस्तावेज़ पेश किया है, जिसने पाकिस्तान के झूठे दावों की पोल खोल दी है।

70 साल में हिंदुओं का सफाया

रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 1941 में जो इलाका अब पाकिस्तान है, वहां हिंदुओं की आबादी 14.6 प्रतिशत थी। बंटवारे के बाद से यह आंकड़ा लगातार गिरता गया और आज पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या 2 फीसदी से भी कम रह गई है। यह गिरावट महज एक संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित हिंसा, बेदखली और आर्थिक प्रताड़ना का परिणाम है।

कानून के जरिए पंगु बनाने की नीति

विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान ने 1949 के प्रस्ताव के बाद खुद को पूरी तरह इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया। इसके बाद शत्रु संपत्ति कानून जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर हिंदुओं की पुश्तैनी जमीनें और मंदिर जब्त कर लिए गए। संविधान के अनुच्छेद 41 और 91 के तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का पद सिर्फ मुसलमानों के लिए आरक्षित कर दिया गया, जिससे गैर-मुस्लिमों को दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया गया है।

बच्चियों का अपहरण और जबरन धर्मांतरण

रिपोर्ट का सबसे डरावना अध्याय हिंदू और ईसाई लड़कियों पर केंद्रित है। हर साल 1000 से ज्यादा नाबालिग बच्चियों का अपहरण कर जबरन उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है और अपहरणकर्ताओं से निकाह करा दिया जाता है। गरीब परिवारों के पास पुलिस या अदालत में जाने की न तो शक्ति है और न ही संसाधन, जिस कारण यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।

राजधानी में मंदिर बनाने पर भी पाबंदी

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहां आज भी हिंदुओं के लिए एक भी मंदिर नहीं है। 2020 में जब मंदिर निर्माण की कोशिश की गई, तो कट्टरपंथियों के हिंसक विरोध के चलते काम बीच में ही रुकवा दिया गया। आज भी वह मंदिर अधूरा पड़ा है, जो धार्मिक स्वतंत्रता के दावों की सच्चाई बयां करता है।

ब्रिटेन से 5 सख्त कदम उठाने की मांग

इनसाइट यूके ने ब्रिटिश सरकार से पाकिस्तान के खिलाफ कड़े रुख की मांग की है:

  1. मानवाधिकार की शर्त: पाकिस्तान के साथ हर कूटनीतिक बातचीत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को अनिवार्य शर्त बनाया जाए।
  2. आर्थिक मदद पर लगाम: पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता को मानवाधिकारों में सुधार से जोड़ा जाए।
  3. ब्रिटिश हाई कमीशन में विशेष नियुक्ति: इस्लामाबाद स्थित दूतावास में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि नियुक्त हों।
  4. छमाही रिपोर्ट: ब्रिटेन सरकार हर 6 महीने में पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की स्थिति पर आधिकारिक रिपोर्ट जारी करे।
  5. शरण का रास्ता: धार्मिक उत्पीड़न के पीड़ितों के लिए ब्रिटेन में सुरक्षित शरण के विशेष कानूनी रास्ते खोले जाएं।

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