UP Election 2027: गोंडा में भाजपा का अभेद्य किला, क्या सदर सीट पर बढ़ रही है मुश्किल?
News Image

अवध और पूर्वांचल की दहलीज पर स्थित गोंडा जिला पिछले दो विधानसभा चुनावों से भाजपा का अभेद्य किला बना हुआ है। 2017 और 2022 में जिले की सातों सीटों पर कमल खिलाकर भाजपा ने अपना लोहा मनवाया था। हालांकि, 2022 के आंकड़ों में छिपी मामूली जीत के अंतर ने 2027 के लिए राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

जनसांख्यिकी और सामाजिक ताना-बाना गोंडा की 93 फीसदी आबादी ग्रामीण है, जिसका सीधा असर चुनावी मुद्दों पर दिखता है। यहाँ मुख्य रूप से खेती, बाढ़ और गन्ना किसानों की समस्याएं हावी रहती हैं। जिले में करीब 80 फीसदी हिंदू और 20 फीसदी मुस्लिम आबादी है। साक्षरता दर (59%) के मामले में यह जिला राज्य के औसत से पीछे है, जिसमें महिला साक्षरता केवल 47 फीसदी दर्ज है।

सातों सीटों का गणित: भाजपा की पकड़ जिले में सात विधानसभा सीटें हैं—मेहनौन, गोंडा सदर, कटरा बाजार, गौरा, कर्नलगंज, मनकापुर (SC) और तरबगंज। 2022 के चुनाव में भाजपा ने इन सातों सीटों पर जीत दर्ज की थी। तरबगंज में भाजपा ने 53 हजार से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की, जबकि मनकापुर में 42 हजार और कर्नलगंज में 35 हजार वोटों की बढ़त बनाई।

गोंडा सदर: भाजपा के लिए हॉट सीट का खतरा गोंडा सदर सीट भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। 2022 में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण सिंह यहां से मात्र 6,699 वोटों के अंतर से जीते थे। 2017 में यह अंतर करीब 11,600 था, जो कि 2022 में घटकर लगभग आधा रह गया। इसी तरह कटरा बाजार में भी जीत का अंतर कम हुआ है। यह ट्रेंड संकेत देता है कि भाजपा भले ही मजबूत हो, लेकिन कई सीटों पर सपा की चुनौती लगातार बढ़ रही है।

2027 के लिए बिसात बिछनी शुरू 2024 के लोकसभा नतीजों ने संकेत दिया है कि गोंडा में मुकाबला सीधा भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच है। जहां एक ओर भाजपा बूथ सम्मेलनों के जरिए मिशन 2027 को धार दे रही है, वहीं सपा अपने पुराने प्रत्याशियों और जातीय समीकरणों (ब्राह्मण, मुस्लिम, यादव और ओबीसी) को साधने में जुटी है।

जातीय समीकरणों का प्रभाव जिले की हर सीट का जातीय गणित अलग है। सदर सीट पर ब्राह्मण, मुस्लिम और अनुसूचित जाति के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। वहीं, मनकापुर (आरक्षित) में पासी-जाटव वोटबैंक बड़ा फैक्टर है। अन्य सीटों पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, कुर्मी और निषाद समुदाय का मिश्रण हार-जीत तय करता है।

आने वाले चुनाव में क्या भाजपा अपना विजय रथ 2022 की तरह दौड़ा पाएगी, या सिमटता जीत का अंतर 2027 में खेला कर देगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

हमेशा मेरी बहन रहोगी : लव गिल को नॉमिनेट करने के बाद स्काउट की दोस्त वाली हरकत पर मचा बवाल

Story 1

मां से किया वादा और उड़ गया आसमान में: मजदूर बेटे ने पूरी सैलरी खर्च कर फ्लाइट से घर पहुंचकर जीता सबका दिल!

Story 1

लॉस एंजेलिस में गूंजा रामायण का जयकारा: अनुपम खेर ने खोला जटायु वाले रोल का राज

Story 1

बस्तर के 116 दिग्गजों की घटेगी VIP सुरक्षा: सियासत में बड़े बदलाव की तैयारी

Story 1

UP TGT-PGT भर्ती में उबाल: नए नियमों के खिलाफ सड़कों पर छात्र, 200 के खिलाफ एफआईआर

Story 1

भारतीय सेना को मिली नई ताकत: अब लद्दाख की ठंड और कच्छ की गर्मी में भी बेधड़क चलेगा सिंधु ATV

Story 1

चक्रवात अर्नब का धनबाद पर हमला: तापमान में भारी गिरावट, अगले 48 घंटे के लिए यलो अलर्ट जारी

Story 1

MLC नतीजों का पूरा रिपोर्ट कार्ड: 13 सीटों पर BJP का दबदबा, यूपी में सपा का कमबैक और बिहार में जन सुराज की एंट्री!

Story 1

लखनऊ में युवाओं के लिए बंपर भर्ती: रोजगार मेले में 1,500 पदों पर मिलेगा मौका, ऐसे करें आवेदन

Story 1

मुंबई में अब कचरा फेंकते ही बोलेगा कैमरा: भाई साहब, डस्टबिन घर पर भूल आए क्या?