UP TGT-PGT भर्ती में उबाल: नए नियमों के खिलाफ सड़कों पर छात्र, 200 के खिलाफ एफआईआर
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प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में TGT-PGT शिक्षक भर्ती परीक्षा के नियमों में किए गए बदलावों को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। प्रयागराज स्थित शिक्षा निदेशालय में पिछले कई दिनों से चल रहा छात्रों का धरना मंगलवार को हिंसक हो गया, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी है।

क्या है विवाद और छात्रों की मांग?

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांग भर्ती प्रक्रिया में लागू की गई 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता को खत्म करना है। छात्रों का तर्क है कि नई नियमावली के कारण हजारों योग्य अभ्यर्थी प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं। इसके अलावा, छात्र सिंगल सब्जेक्ट (एकल विषय) से जुड़ी शर्तों में किए गए बदलावों का भी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को पुरानी नियमावली के आधार पर ही भर्ती अवसर देना चाहिए।

बैरिकेडिंग तोड़कर निदेशालय में घुसे छात्र

मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब बेकाबू हो गई जब गुस्साए छात्र पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग को तोड़कर शिक्षा निदेशालय परिसर के अंदर घुस गए। इस दौरान वहां जमकर हंगामा हुआ। निदेशालय की ओर से दी गई शिकायत में सरकारी काम में बाधा डालने, कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार और वाहनों को क्षति पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

200 अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा

हंगामे के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस ने अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौके पर लगे CCTV फुटेज को खंगाला जा रहा है, ताकि शामिल लोगों की पहचान कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

डराने की कोशिश का आरोप

बुधवार को भी शिक्षा निदेशालय में छात्रों का धरना जारी रहा। शाम के समय पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने पहुंचे और उन्हें निर्धारित धरना स्थल पर जाने का निर्देश दिया। हालांकि, छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन उन पर मुकदमे दर्ज कर और डरा-धमका कर उनके लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश कर रहा है।

आरक्षण का मुद्दा भी उठा

प्रदर्शन के दौरान आरक्षित वर्ग के छात्रों ने भी आवाज उठाई है। छात्रों का आरोप है कि 50% अंकों की बाध्यता लागू करते समय SC/ST और OBC वर्ग के लिए निर्धारित 5% की छूट का प्रावधान सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है, जिससे सामाजिक न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। फिलहाल शिक्षा निदेशालय परिसर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

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