रामलीला मैदान में इंडिया का शक्ति प्रदर्शन: राहुल गांधी के साथ नजर आएंगी नेहा बोरा!
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नई दिल्ली: आगामी 1 नवंबर 2026 को दिल्ली का रामलीला मैदान एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का गवाह बनने जा रहा है। विपक्षी गठबंधन इंडिया के बैनर तले आयोजित चलो दिल्ली रामलीला मार्च में आईसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है।

नेहा बोरा का ऐलान: लड़ाई जारी रहेगी आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया है कि वह इस मार्च में शामिल होंगी। उन्होंने लिखा, हम 1 नवंबर को रामलीला मैदान में एसआईआर (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। यह पोस्ट संकेत देता है कि विपक्षी मोर्चे पर छात्र संगठनों का समर्थन भी पूरी मजबूती के साथ जुटाया जा रहा है।

राहुल गांधी के साथ पुराना नाता नेहा बोरा और राहुल गांधी का साथ नया नहीं है। इससे पहले जून में जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने नेहा बोरा से मुलाकात की थी। तब दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के विरोध में दोनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी। इसके बाद, अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट तक हुए मार्च और राहुल गांधी के आवास पर हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में भी नेहा की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बटोरी थी।

वोट चोरी और लोकतंत्र पर राहुल का वार कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस रैली के लिए सोशल मीडिया के जरिए लगातार लोगों और छात्र संगठनों को एकजुट कर रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि यह मार्च केवल किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की आत्मा को बचाने की कोशिश है। उन्होंने इसे वोट चोरी रोकने और संविधान की रक्षा करने वाला आंदोलन बताया है।

डरने की जरूरत नहीं : राहुल गांधी रैली की सफलता को लेकर आश्वस्त राहुल गांधी ने लोगों को बिना डरे आने का आह्वान किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा, पुलिस और लाठीचार्ज की चिंता न करें, भाजपा में इतनी हिम्मत नहीं कि वे कोई हरकत करें। अगर आपको लगता है कि भारत के लोकतंत्र और आपकी अभिव्यक्ति पर हमला हो रहा है, तो बिना घबराए मार्च में शामिल हों।

विपक्ष की बड़ी लामबंदी राहुल गांधी ने देशभर के विभिन्न छात्र संगठनों और विचारधाराओं से ऊपर उठकर लोगों को इस मार्च से जुड़ने की अपील की है। 1 नवंबर को होने वाला यह प्रदर्शन सरकार के खिलाफ विपक्ष की अब तक की सबसे बड़ी लामबंदी माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मार्च में भीड़ का आंकड़ा क्या संदेश लेकर आता है।

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