राहुल गांधी का तीखा हमला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने IDBI बैंक के निजीकरण के फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय में देश के उद्योगों को खड़ा करने के लिए बैंक बनाए जाते थे, जबकि मोदी सरकार के दौर में उन्हें बेचा जा रहा है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।
पहले बोली, फिर दाम तय का आरोप राहुल गांधी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस सौदे में प्रक्रिया का सही पालन नहीं हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मोदी के समय में पहले बोली देखी गई और फिर दाम तय किया गया। उनके अनुसार, यह राष्ट्रीय संपत्तियों को औने-पौने दाम पर बेचने जैसा है।
संपत्तियों के कम मूल्यांकन की आशंका IDBI बैंक के कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने भी इस सौदे पर गंभीर चिंता जताई है। मंच के संयोजक देवीदास तुलजापुरकर का कहना है कि वर्तमान बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह सौदा जल्दबाजी में किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि बैंक की संपत्तियों, भविष्य की कमाई और रणनीतिक महत्व का मूल्यांकन बहुत कम किया गया है।
फेयरफैक्स को बेची जा रही 60.72% हिस्सेदारी सरकार ने 14 अक्टूबर को बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने की मंजूरी दी है। यह सौदा लगभग 53,000 करोड़ रुपये का है। इसमें सरकार की 30.48% और LIC की 30.24% हिस्सेदारी शामिल है। रिजर्व बैंक की मंजूरी मिलने पर यह प्रक्रिया चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर्मचारी मंच ने सरकार से मांग की है कि वह मूल्यांकन की पद्धति और बिक्री मूल्य तय करने के आधार सार्वजनिक करे। उन्होंने खरीदार कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड की पारदर्शी जांच पर जोर दिया है। उनका तर्क है कि किसी बड़े बैंक का नियंत्रण सौंपना केवल नियामकीय मंजूरी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके प्रति सार्वजनिक जवाबदेही भी होनी चाहिए।
आरक्षण और रोजगार को लेकर चिंता कर्मचारियों ने संसद में तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह द्वारा दिए गए पुराने आश्वासन की याद दिलाई, जिसमें सरकार ने 51 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखने का वादा किया था। मंच का कहना है कि निजीकरण से वंचित समुदायों के लिए आरक्षण, रोजगार सुरक्षा और वित्तीय समावेशन जैसे महत्वपूर्ण अधिकार कमजोर नहीं होने चाहिए। ज्ञात हो कि बैंक में वर्तमान में 19,108 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की है।
कांग्रेस के समय में IDBI बना - देश का उद्योग खड़ा करने के लिए।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 30, 2026
मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ।
कांग्रेस के time पे बैंक बनते थे। मोदी के time में बिकते हैं।
मैं IDBI बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूँ। https://t.co/6dIok1fxV1 pic.twitter.com/uLT7mWTYyr
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