धोनी की विरासत से आगे निकला झारखंड: दलीप ट्रॉफी में छाए राज्य के 5 मैच विनर
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दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन की जीत ने भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक नए केंद्र का उदय दिखाया है। एक समय था जब झारखंड का नाम सिर्फ महेंद्र सिंह धोनी के इर्द-गिर्द सिमटा रहता था, लेकिन अब यह राज्य बल्लेबाजी प्रतिभाओं की नई नर्सरी बनकर उभरा है।

ईस्ट जोन की जीत में झारखंड का जलवा दलीप ट्रॉफी जीतने वाली ईस्ट जोन की टीम में झारखंड के पांच खिलाड़ियों का होना कोई मामूली बात नहीं है। कप्तान ईशान किशन के साथ विराट सिंह, कुमार कुशाग्र, शिखर मोहन और अनुकूल रॉय की मौजूदगी ने साबित कर दिया कि झारखंड क्रिकेट अब धोनी युग से निकलकर एक सामूहिक शक्ति बन चुका है।

नए सितारों की चमक झारखंड क्रिकेट के इन पांच रत्नों ने न केवल टीम में जगह बनाई, बल्कि जीत में निर्णायक भूमिका निभाई। पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता श्रीधरन शरथ ने भी फाइनल के दौरान स्वीकार किया कि झारखंड से आने वाले युवा क्रिकेटरों में तकनीक और आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल है।

कुमार कुशाग्र और शिखर मोहन का दौर JSCA के सचिव और पूर्व भारतीय खिलाड़ी सौरभ तिवारी ने विशेष रूप से कुमार कुशाग्र और शिखर मोहन के प्रदर्शन की सराहना की है। कुशाग्र, जिन्होंने 18 साल की उम्र में डेब्यू किया था, अब तक 6 शतकों के साथ 2000 से अधिक रन बना चुके हैं। वहीं, इस सीजन में पदार्पण करने वाले शिखर मोहन ने 55 के औसत से रन बरसाकर सबको हैरान कर दिया है।

कौशल विकास पर जोर सौरभ तिवारी का मानना है कि यह बदलाव रातों-रात नहीं आया है। उन्होंने बताया कि अब झारखंड क्रिकेट संघ सिर्फ प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। तिवारी के अनुसार, जूनियर स्तर पर तकनीक को मजबूत करने का परिणाम अब बड़े स्कोर और शतकों के रूप में मिल रहा है।

भविष्य के लिए शुभ संकेत धोनी के बाद झारखंड के लिए यह सुनहरा दौर है। न केवल कुशाग्र और शिखर जैसे खिलाड़ी, बल्कि अनुकूल रॉय जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी टीम को स्थिरता दे रहे हैं। पांच खिलाड़ियों का एक साथ जोनल टीम में चमकना इस बात का प्रमाण है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय टीम में झारखंड का दबदबा और भी बढ़ने वाला है।

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