वैश्विक व्यापार से US प्रतिबंध तक: दिल्ली में मोदी-पुतिन-पेजेश्कियान की तिकड़ी से ट्रंप को कड़ा संदेश
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नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में एक नया भू-राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक मंच से वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को नई दिशा देने और अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने का स्पष्ट संकेत दिया है।

समुद्री सुरक्षा पर पीएम मोदी का जोर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक व्यापार के लिए निर्बाध सप्लाई चेन पर जोर दिया। उन्होंने कहा, वैश्विक व्यापार की प्रगति तभी संभव है जब समुद्री रास्ते सुरक्षित हों, सप्लाई रूट्स खुले हों और नाविक सुरक्षित रहें।

विशेषज्ञ इसे सीधे तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट से जोड़कर देख रहे हैं। भारत का फ्रीडम ऑफ नेविगेशन का समर्थन करना यह बताता है कि दिल्ली किसी भी देश द्वारा व्यापारिक मार्गों को अवरुद्ध किए जाने के सख्त खिलाफ है।

पुतिन का तंज: पुरानी ताकतों का युग ढल रहा है रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में गहरे संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने कहा, 20वीं सदी में जो आर्थिक ताकतें सबसे आगे थीं, अब उनकी जगह उभरती अर्थव्यवस्थाएं ले रही हैं।

पुतिन ने हालांकि यह स्वीकार किया कि पश्चिमी देशों के पास अभी भी तकनीकी बढ़त है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि दुनिया की प्रकृति निरंतर बदलाव की है और अब ब्रिक्स देश स्वयं को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

डॉलर के बजाय अपनी करेंसी पर जोर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के लिए राष्ट्रीय करेंसी के इस्तेमाल को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक वित्तीय प्रणाली कुछ सीमित मुद्राओं पर निर्भर है, जो राजनीतिक दबावों और प्रतिबंधों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।

पेजेश्कियान ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को सदस्य देशों के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए मुख्य वित्तीय स्रोत बनाने का आह्वान किया। यह मांग सीधे तौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने और एक स्वतंत्र आर्थिक तंत्र खड़ा करने की ब्रिक्स देशों की साझा महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।

ट्रंप प्रशासन के लिए क्या है संकेत? यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका की ओर से वैश्विक व्यापार और प्रतिबंधों को लेकर आक्रामक रुख अपनाया जा रहा है। मोदी, पुतिन और पेजेश्कियान का एकजुट होना यह संदेश देता है कि ब्रिक्स अब केवल एक चर्चा मंच नहीं, बल्कि एक ऐसा आर्थिक ब्लॉक बनने की दिशा में है जो डॉलर-आधारित वित्तीय प्रणाली के समानांतर एक सुरक्षित और स्वतंत्र विकल्प तैयार करने में सक्षम है।

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