145 साल की परंपरा: नागपुर में काली-पीली का मिलन, बड़ग्या के जरिए तीखे राजनीतिक कटाक्ष
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नागपुर की 145 साल पुरानी ऐतिहासिक परंपरा मारबत और बड़ग्या महोत्सव शुक्रवार को पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। शहर की तंग गलियों से निकले इस अद्भुत जुलूस में बुराइयों को विदा करने का संकल्प दिखाई दिया। इस साल का उत्सव राजनीतिक कटाक्ष और सामाजिक मुद्दों के आईने के रूप में उभरकर सामने आया।

काली-पीली का मिलन और जनसैलाब हर साल की तरह इस बार भी काली और पीली मारबत का मिलन आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। शहर के लोगों ने पारंपरिक गीतों और नारों के बीच अपनी बुराइयों को मारबत के साथ विदा किया। खास बात यह रही कि प्रशासन के कड़े नियमों के चलते इस बार डीजे की गूंज तो नहीं थी, लेकिन लोगों के जोश और पारंपरिक उत्साह में रत्ती भर भी कमी नहीं दिखी।

बड़ग्या के जरिए तीखे सियासी वार महोत्सव में तैयार किए गए बड़ग्या (पुतले) चर्चा का विषय रहे। मस्कासाथ में पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर पर निशाना साधते हुए फेल कमाल, बलूचिस्तान में बुरा हाल जैसे नारों वाले पुतले आकर्षण का केंद्र बने। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की ओर से कॉकरोच जनता पार्टी हटाओ और मुंढे के खिलाफ किए गए कटाक्षों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी।

सामाजिक मुद्दों पर मुखर रही जनता उत्सव सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा। भालदारपुरा में एकता मारबत उत्सव मंडल ने मेरठ में हुए चर्चित हत्याकांड के खिलाफ व्हाइट मार्च निकाला, जो बढ़ते महिला अपराधों के प्रति एक कड़ा संदेश था। वहीं, महंगाई और महिला सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी बड़ग्या के जरिए प्रशासन का ध्यान खींचा गया।

सुरक्षा का अभेद्य कवच उत्सव के दौरान शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटिल ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। करीब 4,000 पुलिसकर्मियों, एसआरपीएफ की टुकड़ी और एक हजार होमगार्ड्स की तैनाती की गई थी। शराब पीकर हुड़दंग मचाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

विदेशी मेहमान बने गवाह इस बार नागपुर महानगरपालिका ने इस अनूठी परंपरा को वैश्विक पहचान देने का प्रयास किया। मनपा की विशेष पहल पर कई विदेशी पर्यटकों ने मारबत महोत्सव का लुत्फ उठाया। शहर की बुराइयों को विदा करने की यह सदियों पुरानी सांस्कृतिक मिसाल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही जा रही है। इडा, पीडा घेऊन जा गे मारबत के जयकारों के साथ शहर ने एक बार फिर नकारात्मकता को पीछे छोड़कर नई सकारात्मकता का आह्वान किया।

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