ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: मोदी-पुतिन की गर्मजोशी और 2100 साल पुरानी शांति दूत किताब
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दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य के साथ हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया। गले मिलने के साथ ही पीएम मोदी ने पुतिन को संत तिरुवल्लुवर की 2100 साल पुरानी तमिल दार्शनिक कृति तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया।

क्यों खास है यह उपहार? पीएम मोदी ने पुतिन को स्पष्ट किया कि यह किताब केवल पन्नों का संग्रह नहीं, बल्कि मानव जीवन के मूल्यों और जनता के बीच जुड़ाव का प्रतीक है। पुतिन ने इस अनूठे उपहार के लिए आभार व्यक्त किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कूटनीतिक इशारा दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाता है।

जंग और शांति पर मंथन उपहारों के आदान-प्रदान के बाद, दोनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। मुख्य फोकस यूक्रेन-रूस युद्ध को रोकने और शांति की राह खोजने पर रहा। इससे पहले बिश्केक में भी पीएम मोदी ने पुतिन से युद्ध के अंत की ओर बढ़ने का आग्रह किया था, जिसे लेकर इस बैठक में गहन विचार-विमर्श हुआ।

व्यापार का महा-लक्ष्य: 2030 तक 100 अरब डॉलर मुलाकात का दूसरा बड़ा पहलू आर्थिक साझेदारी है। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसमें INNOPROM के जरिए औद्योगिक सहयोग, रेल नेटवर्क, टनलिंग, और स्टील वैल्यू चेन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती मजबूती रूस ने भारत को शेष S-400 मिसाइल सिस्टम देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इसके अतिरिक्त, ब्रह्मोस मिसाइल को अपग्रेड करने और सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति पर भी बातचीत जारी है। ऊर्जा क्षेत्र में सिविल न्यूक्लियर सहयोग और उर्वरक (फर्टिलाइजर) उत्पादन में संयुक्त उपक्रम (JV) इस दौरे के महत्वपूर्ण परिणाम हैं।

ईरानी राष्ट्रपति का आगमन भी अहम ब्रिक्स सम्मेलन के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी दिल्ली पहुंचे हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। माना जा रहा है कि अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों के बीच ईरान, ब्रिक्स समूह के माध्यम से डॉलर पर निर्भरता कम करने और नई आर्थिक मजबूती की दिशा में भारत के साथ मिलकर रणनीति बनाएगा।

आगे क्या होगा? ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जहां रूस और ईरान के साथ रणनीतिक संबंधों पर जोर है, वहीं दुनिया की नजरें अब भारत-चीन संबंधों पर टिकी हैं। क्या पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की संभावित मुलाकात रिश्तों में जमी बर्फ पिघला पाएगी? फिलहाल, दिल्ली का भारत मंडपम वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है।

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