9/11 की बरसी: आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर मोदी का दुनिया को कड़ा संदेश
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नई दिल्ली। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए भीषण आतंकी हमलों की बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए दुनिया को इसके खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है।

सीमा पार आतंकवाद का दंश और भारत का संकल्प प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि आतंकवाद ने दुनिया भर में अनगिनत लोगों की जान ली है। भारत, जो दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है, ने इस खतरे के खिलाफ अपना अडिग संकल्प दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी विचारधारा या उद्देश्य के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।

बदलते दौर की नई चुनौतियां पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकी खतरे का स्वरूप लगातार बदल रहा है। आज के दौर में आतंकवादी केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग, ऑनलाइन कट्टरपंथ, ड्रोन तकनीक, साइबर हमले, एन्क्रिप्टेड संचार और अवैध वित्तीय नेटवर्क अब वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं।

दोहरे मापदंडों पर प्रहार प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के उस रुख को फिर दोहराया कि आतंकवाद को अच्छे या बुरे की श्रेणी में बांटना घातक है। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक सुविधा के लिए किसी आतंकी संगठन को संरक्षण देना अंततः पूरी दुनिया के लिए जोखिम पैदा करता है। भारत लंबे समय से आतंकवाद की एक सर्वमान्य अंतरराष्ट्रीय परिभाषा तय करने की मांग करता रहा है।

सामूहिक सुरक्षा की आवश्यकता आतंकवाद से निपटने के लिए मोदी ने खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकी वित्तपोषण (Terror Funding) को रोकने को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक चुनौतियों का सामना कोई भी एक देश अकेले नहीं कर सकता। इसके लिए सरकारों, तकनीकी कंपनियों और नागरिक समाज को मिलकर ऑनलाइन कट्टरपंथ के प्रसार को रोकना होगा।

9/11: एक सबक, एक प्रतिज्ञा 11 सितंबर 2001 की घटना आधुनिक इतिहास की सबसे भयावह त्रासदी थी, जिसने वैश्विक सुरक्षा नीतियों को हमेशा के लिए बदल दिया। प्रधानमंत्री का यह संदेश इस बात की याद दिलाता है कि भले ही समय बीत जाए, लेकिन आतंकी हिंसा से प्रभावित परिवारों का दर्द और आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति को भुलाया नहीं जाना चाहिए। भारत का संदेश साफ है—आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई समझौता नहीं होगा।

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