बांग्लादेश में करीब 1 साल 9 महीने से न्यायिक हिरासत में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को एक बेहद भावुक मौके पर जेल से बाहर आने की अनुमति मिली। अपनी मां संध्या रानी धर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उन्हें प्रशासन ने 5 घंटे की पैरोल दी थी।
मां की अंतिम इच्छा रही अधूरी संध्या रानी धर लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं। उनके परिवार के अनुसार, मां मरने से पहले अपने बेटे चिन्मय को एक बार जीवित देखना चाहती थीं। परिवार ने जेल प्रशासन से बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल की गुहार लगाई थी, जिसे यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि कैदी को बीमार रिश्तेदार से मिलने देने का कोई प्रावधान नहीं है। 10 सितंबर 2026 की सुबह मां का निधन हो गया और उनकी बेटे से मिलने की अंतिम इच्छा अधूरी ही रह गई।
पुंडरीक धाम में फूट-फूटकर रो पड़े चिन्मय पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद चिन्मय कृष्ण दास सीधे चटगांव के पुंडरीक धाम पहुंचे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वे अपनी मां की पार्थिव देह से लिपटकर फूट-फूटकर रोते हुए दिखाई दिए। वहां मौजूद राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं के सामने उन्होंने माथा टेका और भावुक हो गए। अंतिम संस्कार की रस्में पूरी होने के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।
क्यों सलाखों के पीछे हैं चिन्मय? चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उन पर चटगांव में हिंदू रैली के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद, नवंबर 2024 में ही अदालत परिसर में हुए बवाल और वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या के मामले में भी उन्हें आरोपी बनाया गया।
क्या उन्हें सजा मिल चुकी है? चिन्मय फिलहाल किसी अंतिम दोषसिद्धि की सजा नहीं काट रहे हैं, बल्कि वे न्यायिक हिरासत में हैं। उन पर राजद्रोह, सरकारी काम में बाधा डालने और हिंसा के कई मामले दर्ज हैं। हालांकि उन्हें कुछ मामलों में हाई कोर्ट से जमानत मिली, लेकिन अन्य लंबित मामलों के कारण उनकी रिहाई संभव नहीं हो पाई है।
कौन हैं चिन्मय कृष्ण दास? चिन्मय कृष्ण दास (पूर्व नाम चंदन कुमार धर) बांग्लादेश सम्मिलितो सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं और पूर्व में इस्कॉन से जुड़े थे। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए कई बड़े प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है। उनकी स्थिति को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं जताई जा रही हैं।
MA BHABANI plz forgive me for seeing this. We couldn’t do anything to help free him. 🙏🇧🇩
— Bangladeshi Hindus Community🚨🇧🇩 (@Hindubd49346) September 11, 2026
I couldn’t hold back my tears after watching this video. Not just me—the whole world and even nature seemed to cry.
Krishna please don’t let their tears be wasted. 💔 pic.twitter.com/WFCgLouNSS
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