पुतिन का दिल्ली आगमन: ब्रिक्स समिट और मोदी के साथ महा-बैठक पर टिकी दुनिया की नजरें
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नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर शुक्रवार को भारत पहुंच गए हैं। उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी दिल्ली आया है। पुतिन यहां 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

ब्रिक्स पर वैश्विक फोकस

पुतिन की यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेना है। बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच यह मंच अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इस सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और विकासशील देशों के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।

मोदी-पुतिन वार्ता: क्या है एजेंडा?

ब्रिक्स से इतर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात कूटनीतिक रूप से सबसे अहम है। दोनों नेता रक्षा, व्यापार, निवेश और ऊर्जा के क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर मंथन करेंगे। जानकारों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के संबंधों को नई गति दे सकती है।

व्यापार असंतुलन और भुगतान की चुनौती

भारत और रूस के बीच व्यापार में तेजी आई है, लेकिन यह मुख्य रूप से ऊर्जा आयात पर निर्भर है। भारत अब रूसी बाजार में अपनी दवाइयों, कृषि उत्पादों और इंजीनियरिंग सामान की पैठ बढ़ाना चाहता है। साथ ही, पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सुरक्षित व्यापार और भुगतान प्रणाली को सुगम बनाना वार्ता का प्रमुख हिस्सा होगा।

ऊर्जा और रक्षा सहयोग का भविष्य

भारत के लिए रूस अभी भी ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है। यूक्रेन संकट के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। इस यात्रा में कुडनकुलम परमाणु परियोजना और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर बात होगी। रक्षा क्षेत्र में, भारत अब मेक इन इंडिया और तकनीक हस्तांतरण पर जोर दे रहा है, जिस पर रूसी पक्ष से ठोस चर्चा की उम्मीद है।

भू-राजनीति और संतुलित रुख

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक तनाव चरम पर है। भारत ने हमेशा से कूटनीति और बातचीत के जरिए शांति का पक्ष लिया है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर शांति की वकालत करेंगे। भारत ने पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को बेहतर करते हुए रूस के साथ अपनी पुरानी विशेष रणनीतिक साझेदारी को कायम रखकर एक सधा हुआ कूटनीतिक संतुलन बनाया है।

अगले तीन दिन यह स्पष्ट कर देंगे कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत और रूस अपने संबंधों को किस नई दिशा में ले जाने वाले हैं।

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