वर्ल्ड कप से बाहर, दिग्गज का संन्यास और वो अनचाहा रिकॉर्ड: मैनुअल नोयर का दुखद अंत
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फीफा वर्ल्ड कप 2026 में चार बार की चैंपियन जर्मनी का सफर बेहद निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। राउंड ऑफ 32 के रोमांचक मुकाबले में पैराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को 4-3 से मात देकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। निर्धारित और अतिरिक्त समय तक मुकाबला 1-1 की बराबरी पर था।

इस हार के साथ ही जर्मनी के महान गोलकीपर मैनुअल नोयर ने इंटरनेशनल फुटबॉल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। 40 वर्षीय नोयर पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि यह टूर्नामेंट उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय पड़ाव होगा।

इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ नाम

मैदान पर उतरते ही नोयर ने एक बड़ा कीर्तिमान अपने नाम किया। उन्होंने जर्मनी के लिए फीफा वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा मैच शुरू करने का नया रिकॉर्ड बनाया। अपना 23वां वर्ल्ड कप मैच खेलते हुए उन्होंने लोथार मथाउस और मिरोस्लाव क्लोस (दोनों 22 मैच) को पीछे छोड़ दिया।

जाते-जाते जुड़ा अनचाहा रिकॉर्ड

हालांकि, विदाई के दिन उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हुआ जिसने उनके शानदार करियर के अंत को थोड़ा फीका कर दिया। नोयर वर्ल्ड कप इतिहास में लगातार 10 मैचों में गोल खाने वाले दुनिया के दूसरे गोलकीपर बन गए हैं। उनसे पहले यह अनचाहा रिकॉर्ड मेक्सिको के एंटोनियो कार्बाजाल के नाम था।

गौर करने वाली बात यह है कि नोयर ने वर्ल्ड कप में आखिरी बार क्लीन शीट 2014 के फाइनल में रखी थी, जब जर्मनी ने अर्जेंटीना को हराकर खिताब जीता था। उसके बाद से खेले गए हर वर्ल्ड कप मैच में उनके खिलाफ कम से कम एक गोल जरूर हुआ है।

काफी भावुक नजर आए नोयर

मैच के बाद नोयर काफी भावुक दिखे। उन्होंने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा, हम सभी बेहद दुखी हैं। आज किस्मत हमारे साथ नहीं थी। कई मौके बनाने के बाद भी हम उन्हें गोल में नहीं बदल सके।

नोयर ने आगे कहा कि पेनल्टी शूटआउट में खिलाड़ियों के आत्मविश्वास की कमी का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। उन्होंने माना कि ऐसी टीमों के खिलाफ जर्मनी को जीत दर्ज करनी चाहिए थी, लेकिन अंत वैसा नहीं हुआ जैसा उन्होंने सोचा था।

एक महान युग का अंत

मैनुअल नोयर का अंतरराष्ट्रीय करियर आंकड़ों के लिहाज से बेहद शानदार रहा है। उन्होंने अपने देश के लिए 128 मैच खेले, 50 क्लीन शीट रखीं और 2014 में टीम को वर्ल्ड चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके संन्यास के साथ ही फुटबॉल का एक स्वर्णिम युग समाप्त हो गया है।

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