सिंधु जल का संकट: पाकिस्तान में मचा हाहाकार, मंत्री ने कहा- युद्ध से ज्यादा मौतें पानी की कमी से हो रहीं
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इस्लामाबाद: भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को निलंबित करने के बाद पाकिस्तान में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। पानी की किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने अब बेतुके दावे करते हुए भारत पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के कारण पाकिस्तान में अब तक 6,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

युद्ध से भी बदतर हैं हालात मुसादिक मलिक ने एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में दावा किया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत किसी भी युद्ध में नहीं होती, जितनी पानी की किल्लत की वजह से पाकिस्तान में हो रही है। उन्होंने इसे पर्यावरणीय मुद्दा मानने के बजाय न्याय और अस्तित्व का मुद्दा करार दिया। हालांकि, उन्होंने इस दौरान पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी।

खेती छोड़ने को मजबूर किसान मंत्री ने आगे कहा कि पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और जल संकट के कारण किसान अपनी जमीनें छोड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत के इस एक्शन का असर केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश तक पड़ रहा है। उनके अनुसार, भारत द्वारा पानी का प्रवाह रोकना पाकिस्तान के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है।

गीदड़भभकी: हाथ काट दिए जाएंगे संकट के बीच मुसादिक मलिक ने भारत को चेतावनी देते हुए आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर हाथ डालने की कोशिश की, तो पाकिस्तान उसका करारा जवाब देगा। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि हम उनके हाथ काट देंगे। वहीं, सूचना मंत्री तरार ने दावा किया कि सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है, हालांकि उनके इस दावे की पुष्टि कहीं से नहीं हो सकी है।

भारत का रुख: आतंकवाद बंद तो पानी मिलेगा भारत ने पिछले साल पहलगाम हमले के बाद स्पष्ट कर दिया था कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता। भारत की इस सख्त नीति के बाद पाकिस्तान के कई इलाकों में अब पानी की भारी कमी देखी जा रही है, जिससे बौखलाया पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेबुनियाद बातें कर रहा है।

भारत की कूटनीतिक जीत विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह शोर केवल दुनिया का ध्यान खींचने की एक कोशिश है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहते हुए आतंकवाद के खिलाफ यह बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान अपनी नाकामियों और आतंकवाद को छिपाने के लिए जल संकट को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि आतंकवाद ही इस पूरे संकट की जड़ है।

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