बिजनेस की दुनिया में पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन एक छोटी सी चूक बड़े साम्राज्य को भी खतरे में डाल सकती है। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने हाल ही में अपने करियर का एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने न केवल उनकी सोच बदली, बल्कि उन्हें सफलता के नए आयाम दिए।
एक फॉर्म और हाथ से निकली बड़ी डील करियर के शुरुआती दिनों में अनिल अग्रवाल हर काम खुद करने पर यकीन रखते थे। सुबह सप्लायर्स से मिलना हो या बैंक के काम निपटाना, वे खुद को ही सबसे भरोसेमंद समझते थे। इसी दौरान एक जरूरी फॉर्म समय पर जमा न होने के कारण उनके हाथ से एक बड़ी डील निकल गई। इस घटना ने उन्हें सिखाया कि सब कुछ खुद करने की जिद बिजनेस के लिए घातक हो सकती है।
डेलिगेशन (काम सौंपना) का महत्व इस गलती के बाद अनिल अग्रवाल ने पहली बार एक अकाउंटेंट रखा। उन्होंने महसूस किया कि एक सफल लीडर वही है जो सही काम के लिए सही व्यक्ति को चुन सके। उनका मानना है कि हर बिजनेसमैन को खुद से पूछना चाहिए कि उसके एक घंटे की कीमत क्या है। अगर कोई काम टीम का सदस्य कर सकता है, तो उसे सौंप देना ही बुद्धिमानी है ताकि लीडर बड़े फैसलों और नई योजनाओं पर ध्यान दे सके।
छोटी आदतों से बनती है बड़ी सफलता अनिल अग्रवाल की सफलता रातों-रात नहीं मिली। 9 बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनका कहना है कि समय पर पहुंचना, मीटिंग की तैयारी और हर छोटी जानकारी पर बारीक नजर रखना ही लंबे समय में फर्क पैदा करता है। मुंबई के शुरुआती दिनों में बाजार को समझने की उनकी इसी आदत ने वेदांता जैसे विशाल साम्राज्य की नींव रखी।
शून्य से करोड़ों का सफर पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल 19 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे थे। स्क्रैप के कारोबार से शुरुआत करने वाले अग्रवाल ने आज वेदांता को माइनिंग और मेटल सेक्टर में ग्लोबल लीडर बना दिया है। लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 में 1,74,075 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व हासिल करने तक, उनका सफर अनुशासन और सही टीम के चयन का परिणाम है।
सीख: अनुशासन ही आधार है अनिल अग्रवाल आज भी मानते हैं कि अगर उन्हें फिर से शुरुआत करने का मौका मिले, तो वे छोटी-छोटी बातों पर और अधिक ध्यान देंगे। उनका अनुभव बताता है कि बिजनेस में केवल कड़ी मेहनत काफी नहीं है; इसके लिए सही टीम, काम का सही बंटवारा और हर मिनट की अहमियत समझना बेहद जरूरी है।
*शुरुआती दिनों में मुझे बिजनेस खड़ा करने का सबसे बड़ा सबक एक बड़ी deal के हाथ से निकल जाने पर मिला, और वो था – delegation (काम सौंपने) का महत्व, और ऐसा न करने का नुकसान।
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) June 30, 2026
सरल शब्दों में कहें तो - खुद सब कुछ करने के बजाय, किसी काम के लिए सही व्यक्ति को चुनकर उसे जिम्मेदारी देना और… pic.twitter.com/G37J27iorX
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