ट्रंप के बीजिंग दौरे के तुरंत बाद पुतिन की एंट्री: क्या चीन-रूस की नई धुरी बदल देगी वैश्विक समीकरण?
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दुनिया की नजरें एक बार फिर बीजिंग पर टिकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा के खत्म होते ही, अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दौरे का ऐलान हो गया है। क्रेमलिन और चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि पुतिन 19 और 20 मई को चीन की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे।

शी-पुतिन की मुलाकात: रणनीति और साख

इस दौरे का मुख्य उद्देश्य रूस और चीन के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाना है। क्रेमलिन के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग के बीच लंबी द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार की जाएगी। बैठक के अंत में दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जाने की भी उम्मीद है।

आर्थिक और व्यापारिक एजेंडा

कूटनीति के अलावा, इस यात्रा का बड़ा हिस्सा आर्थिक सहयोग पर केंद्रित होगा। पुतिन चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देश व्यापारिक संबंधों को मजबूती देने और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर गहन चर्चा करेंगे। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उच्चस्तरीय बातचीत की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

क्यों अहम है यह दौरा?

रूस और चीन के बीच बढ़ती नजदीकियां किसी से छिपी नहीं हैं। व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग अब तक 40 से अधिक बार मुलाकात कर चुके हैं, जो दोनों देशों के गहरे होते तालमेल को दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार की चर्चा में यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन संबंध और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे गंभीर विषय केंद्र में रहेंगे।

ट्रंप के बाद पुतिन का संदेश

दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के दौरान भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पुतिन का जिक्र किया था। अब ट्रंप के दौरे के ठीक बाद पुतिन का बीजिंग पहुंचना यह संकेत देता है कि चीन दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों के साथ संतुलन बैठाने की कोशिश कर रहा है। रूस और चीन के बीच इस बढ़ती जुगलबंदी ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

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