केरल में वी.डी. सतीशन की गणेश परिक्रमा : सीएम बनने से पहले का शक्ति संतुलन या राजनीतिक मजबूरी?
News Image

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में यूडीएफ (UDF) की ऐतिहासिक जीत के बाद राज्य की राजनीति का केंद्र तिरुवनंतपुरम बन गया है। मनोनीत मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन इस समय चर्चाओं के केंद्र में हैं, लेकिन उनके फैसलों से ज्यादा उनकी मुलाकातों की चर्चा है। शपथ ग्रहण से पहले सतीशन का वरिष्ठ नेताओं के घर जाकर आशीर्वाद लेना राजनीतिक गलियारों में गणेश परिक्रमा के रूप में देखा जा रहा है।

दिग्गजों की दहलीज पर क्यों हैं सतीशन? सतीशन ने अपनी इस यात्रा की शुरुआत एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से की। इसके बाद वे रमेश चेन्निथला, ए.के. एंटनी और वी.एम. सुधीरन के आवासों पर पहुंचे। उन्होंने न केवल जीवित नेताओं से मुलाकात की, बल्कि दिवंगत नेताओं ओम्मन चांडी और जी. कार्तिकेयन के परिवारों के पास जाकर अपनी पुरानी राजनीतिक जड़ों को भी मजबूती से दर्शाया है।

सिर्फ शिष्टाचार या रणनीतिक दांव? राजनीतिक विश्लेषक इस पहल को केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं मान रहे हैं। केरल कांग्रेस का इतिहास गुटबाजी से भरा रहा है। सतीशन का यह कदम कांग्रेस के भीतर असंतोष को खत्म करने की एक सोची-समझी रणनीति है। खुद को गुट-निरपेक्ष नेता के तौर पर पेश कर वे स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि वे किसी एक खेमे के नहीं, बल्कि पूरे दल के नेता हैं।

प्रशासनिक अनुभव की कमी को पाटने की कोशिश सतीशन 2001 से विधायक रहे हैं और एक मुखर विपक्ष के नेता की भूमिका निभाते आए हैं, लेकिन उनके पास सरकार चलाने का सीधा प्रशासनिक अनुभव नहीं है। ए.के. एंटनी और अन्य वरिष्ठों के द्वार जाकर वे यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि वे शासन चलाने में वरिष्ठों के अनुभव का सम्मान करेंगे। यह कदम उनके लिए मार्गदर्शक मंडल को साथ लेकर चलने की एक कूटनीति है।

कैबिनेट गठन की चुनौती सूत्रों के अनुसार, यह परिक्रमा तब तक जारी रहेगी जब तक कैबिनेट का स्वरूप और विभागों का बंटवारा तय नहीं हो जाता। सहयोगी दलों और पार्टी के भीतर के विभिन्न गुटों के बीच सामंजस्य बैठाना सतीशन की पहली बड़ी अग्निपरीक्षा है। दिल्ली में आलाकमान को यह दिखाना जरूरी है कि केरल में सब कुछ नियंत्रण में है और उनकी सरकार एक मजबूत नींव पर खड़ी होगी।

निष्कर्ष वी.डी. सतीशन की यह गणेश परिक्रमा भले ही विरोधियों के लिए तंज का विषय हो, लेकिन जमीनी स्तर पर यह एक विवाद-मुक्त सरकार के गठन की दिशा में उठाया गया कदम है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या यह मुलाकातों का दौर सतीशन को एक सर्वमान्य मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करने में पूरी तरह सफल रहा है या नहीं।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

चोल साम्राज्य का गौरव लौटा वतन: नीदरलैंड्स से भारत वापस आएंगी 11वीं सदी की ऐतिहासिक धरोहरें

Story 1

बॉक्स ऑफिस पर टला महामुकाबला: अजय देवगन और अक्षय कुमार की फिल्मों की बदल गई तारीख

Story 1

क्या नीदरलैंड में भी पहुंची झालमुड़ी ? पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के सामने याद किए चुनावी रंग

Story 1

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0: ईरान को घुटनों पर लाने के लिए ट्रंप के 3 खतरनाक प्लान, मिडिल ईस्ट में मंडराया महायुद्ध का साया

Story 1

पहले जीतते तो 5% भी खुशी नहीं होती... , 18 साल का सूखा खत्म होने पर छलके विराट कोहली के जज्बात

Story 1

अमृत काल बना मृत काल : NEET पेपर लीक और छात्रों की खुदकुशी पर खड़गे का केंद्र पर बड़ा हमला

Story 1

रनों के तूफान में उड़ी गुजरात टाइटंस, KKR की जीत ने प्लेऑफ की रेस में मचाई हलचल

Story 1

सिटी ऑफ पीस से PM मोदी की दुनिया को चेतावनी: युद्ध नहीं, संवाद ही भविष्य का रास्ता

Story 1

हार्दिक पांड्या दूसरी बार बनेंगे दूल्हा: 22 मई को माहिका शर्मा संग रचाएंगे शादी, सामने आई ये चौंकाने वाली वजह

Story 1

डोनाल्ड ट्रंप की टीम से हुई एक टाइपिंग मिस्टेक, इंटरनेट पर मीम्स की आई सुनामी