संसद का विशेष सत्र: महिला आरक्षण और परिसीमन पर आज होंगे 3 बड़े संशोधन बिल पेश
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देश की राजनीति आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। संसद का विशेष सत्र शुरू हो रहा है, जिसमें मोदी सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को धरातल पर उतारने के लिए तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश करेगी। इन बिलों के पारित होने से देश की संसदीय संरचना और राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा।

लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 850 होंगी इन विधेयकों के तहत लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। नई व्यवस्था में राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें होंगी। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 2029 से इन बदलावों को लागू करने की योजना है, जिसके लिए देश भर में नए सिरे से परिसीमन (Delimitation) किया जाएगा।

कौन से तीन विधेयक हो रहे हैं पेश? सरकार तीन प्रमुख संशोधनों पर जोर दे रही है:

  1. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026: दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना।
  2. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026: जनसंख्या की नई परिभाषा तय करना और सदस्यों की संख्या का विस्तार।
  3. परिसीमन विधेयक 2026: लोकसभा और विधानसभा सीटों का नए सिरे से निर्धारण और सीमांकन।

बहस के लिए 18 घंटे का समय संसद के विशेष सत्र में इन बिलों पर चर्चा के लिए 16 से 18 अप्रैल तक का समय तय किया गया है। लोकसभा में पहले दो दिनों में 18 घंटे और राज्यसभा में 10 घंटे की चर्चा होगी। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और गृह मंत्री अमित शाह इन विधेयकों को सदन के पटल पर रखेंगे। इन्हें पारित कराने के लिए सरकार को सदन में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।

विपक्ष का कड़ा विरोध सरकार की इन तैयारियों के बीच विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में परिसीमन प्रक्रिया को असंवैधानिक और त्रुटिपूर्ण करार दिया गया। विपक्ष का तर्क है कि नई जनगणना के आंकड़ों के बिना परिसीमन करना जल्दबाजी है और इससे उत्तर-दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक संतुलन बिगड़ने का डर है।

क्या है परिसीमन का विवाद? विपक्ष का आरोप है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा दक्षिण भारत के उन राज्यों के लिए नुकसानदेह हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण पर बेहतर काम किया है। वहीं, सरकार का दावा है कि सभी राज्यों की सीटों में बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे कोई भी राज्य राजनीतिक रूप से कमजोर नहीं होगा। बहरहाल, आने वाले दिन देश की भावी राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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