कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला आरक्षण कानून को परिसीमन (Delimitation) से जोड़ने के केंद्र सरकार के फैसले पर कड़ा प्रहार किया है। प्रियंका ने सवाल उठाया है कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को उनका हक देना चाहती है, तो वह सीटों की संख्या बढ़ने का इंतजार क्यों कर रही है? उन्होंने इसे तत्काल लागू करने की मांग की है।
सिर्फ बहाना है परिसीमन प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के उस दावे को चुनौती दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी को भी अपनी कुर्सी जाने का डर नहीं है। प्रियंका ने कहा कि अगर यह सच है, तो सरकार को परिसीमन की शर्त हटाकर तुरंत कोटा लागू करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को सत्ता में बने रहने के लिए एक कमजोर बहाने की तरह इस्तेमाल कर रही है।
OBC प्रतिनिधित्व को अनदेखा करने का आरोप सांसद ने संसद में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा OBC आरक्षण की उपेक्षा करने पर तीखी आलोचना की। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को कि OBC का मुद्दा बाद में सुलझाया जा सकता है, प्रियंका ने एक बड़ी सामाजिक मांग को तकनीकी मुद्दा बनाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग समाज का एक बड़ा और मेहनती हिस्सा है, उनके अधिकारों को टालना उनके संघर्षों का अपमान है।
असम मॉडल से लोकतंत्र को खतरा प्रियंका गांधी ने परिसीमन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां राजनीतिक लाभ के लिए सीमाएं बदली गईं, वही मॉडल पूरे देश में लागू करने की तैयारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक इसी रूप में पारित होता है, तो यह लोकतंत्र और देश की अखंडता पर एक खुला हमला होगा।
कांग्रेस ने याद दिलाया अपना इतिहास महिला आरक्षण के श्रेय पर चल रही बहस के बीच प्रियंका गांधी ने पार्टी का पुराना इतिहास दोहराया। उन्होंने कहा कि पंचायतों और नगर पालिकाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने ही पेश किया था। उन्होंने 1928 की नेहरू रिपोर्ट और 1931 के कराची अधिवेशन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में महिलाओं के समान अधिकारों की नींव आजादी की लड़ाई के समय ही रख दी गई थी।
निष्कर्ष प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार महिलाओं के अधिकारों के नाम पर एक ऐसी संसद बनाना चाहती है जहां पिछड़े वर्गों और विविधता का अभाव हो। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह विपक्ष को धर्मसंकट में डालने के बजाय, बिना किसी शर्त और देरी के महिला आरक्षण को पूर्ण स्वरूप में लागू करे।
2010 में स्व. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी और UPA अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने का फिर से प्रयास किया।
— Congress (@INCIndia) April 16, 2026
राज्यसभा में इसे पारित भी कराया गया लेकिन लोकसभा में आम सहमति नहीं बन पाई।
2018 में श्री… pic.twitter.com/WJhKI5Kbjo
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