बंगाल में अर्ध-धर्मांतरण का खौफ: तिलक लगाने पर रोक, दाढ़ी रखने को मजबूर हिंदू!
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पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आई है। हुगली के सौरदीप चक्रवर्ती नगर में हिंदुओं को केवल अपनी जान बचाने और आजीविका चलाने के लिए अपनी धार्मिक पहचान छिपानी पड़ रही है। इसे अर्ध-धर्मांतरण का नाम दिया गया है, जहाँ लोग धर्म तो नहीं बदल रहे, लेकिन कट्टरपंथियों के डर से अपना वेश और हुलिया पूरी तरह बदलने को मजबूर हैं।

क्या है अर्ध-धर्मांतरण का सच? हुगली के कोननगर इलाके में रहने वाले दर्जनों हिंदू परिवार इस समय खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर वे हिंदू पहचान के साथ रहते हैं या तिलक लगाते हैं, तो उन्हें न केवल सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है, बल्कि उन पर शारीरिक हमले की आशंका भी बनी रहती है। पेट पालने के लिए उन्हें मजबूरी में लंबी दाढ़ी रखनी पड़ रही है ताकि वे भीड़ में मुसलमानों जैसे दिखें।

मछली बेचने के लिए बदलना पड़ता है हुलिया सौरदीप चक्रवर्ती नगर के करीब 40-50 परिवार मछली पकड़ने और बेचने का काम करते हैं। जब ये लोग आसपास के मुस्लिम बहुल गांवों में मछली बेचने जाते हैं, तो उन्हें अपना हुलिया बदलना पड़ता है। पीड़ितों का दावा है कि यदि वे अपनी हिंदू पहचान जाहिर करें, तो कोई उनसे सामान नहीं खरीदेगा और उन पर हमला किया जा सकता है। यह स्थिति अफगानिस्तान के तालिबानी शासन जैसी है, जहां सर्वाइवल के लिए अपनी संस्कृति को मिटाना पड़ रहा है।

संविधान की मूल भावना पर सवाल भारत का संविधान अनुच्छेद 25 के तहत हर नागरिक को अपनी इच्छा से धर्म मानने और आचरण करने की स्वतंत्रता देता है। लेकिन पश्चिम बंगाल के इस इलाके में यह हक पूरी तरह कुचला जा रहा है। सवाल यह है कि आजादी के 78 साल बाद भी क्या बंगाल के हिंदुओं को अपनी जान बचाने के लिए अपनी धार्मिक पहचान का त्याग करना पड़ेगा?

प्रशासनिक खामोशी और राजनीतिक संरक्षण? हुगली जिले में 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी करीब 16 प्रतिशत है, लेकिन कुछ इलाकों में कट्टरपंथियों का दबदबा इतना ज्यादा है कि वहां कानून-व्यवस्था भी उनके आगे नतमस्तक नजर आती है। सवाल यह उठता है कि क्या इस अर्ध-धर्मांतरण के पीछे किसी राजनीतिक या प्रशासनिक तंत्र का संरक्षण है? जो कट्टरपंथी देश के अन्य हिस्सों में छोटी घटनाओं पर भी शोर मचाते हैं, वे हुगली की इस भयावह सच्चाई पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

बदलती डेमोग्राफी और बढ़ता खतरा पश्चिम बंगाल में हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर का 21 प्रतिशत से गिरकर 10 प्रतिशत पर आना और मालदा-मुर्शिदाबाद जैसे जिलों का स्वरूप बदलना, पहले से ही गंभीर संकेत दे रहा था। अब हुगली में जिस तरह से अर्ध-धर्मांतरण का खेल चल रहा है, वह बताता है कि आने वाले समय में यह पूरी पहचान को मिटाने की एक सोची-समझी साजिश हो सकती है। अगर जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह स्थिति पूरे बंगाल और अंततः पूरे देश के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।

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