नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक संगठित गिरोह सनातन धर्म और हिंदू आस्था के खिलाफ विषैला दुष्प्रचार फैला रहा है। यह गिरोह बेहद शातिराना अंदाज में हिंदुओं को मानसिक और धार्मिक रूप से भटका हुआ और अस्थिर साबित करने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद साफ है—सनातन धर्म को छोटा दिखाकर एक विशेष मजहब को सर्वोच्च साबित करना और हिंदुओं को धर्मांतरण के लिए उकसाना।
हाल ही में एक डेढ़ मिनट का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें सनातन धर्म के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इस वीडियो के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सनातनी अपनी आस्था पर अडिग नहीं रहते और फैशनेबल ट्रेंड की तरह अपने आराध्य बदलते रहते हैं। यह दुष्प्रचार दिल्ली से लेकर वृंदावन तक सक्रिय एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जो व्यवस्थित तरीके से हिंदू आस्था की नींव को कमजोर करने में जुटा है।
नासिक की एक बड़ी आईटी कंपनी में हुए हालिया धर्मांतरण कांड ने इस पूरे नेटवर्क का असली चेहरा सामने ला दिया है। वहां के आरोपी पीड़ितों का ब्रेनवॉश करने के लिए वही कुतर्क दे रहे थे, जो आज सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का यह गिरोह फैला रहा है। वे भगवान के अस्तित्व और पौराणिक कथाओं पर सवाल उठाकर हिंदुओं को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि उनकी आस्था तर्कसंगत नहीं है।
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि कैसे पहचान बदलकर कॉल सेंटर में घुसी महिला पुलिसकर्मियों ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया। यह साबित करता है कि धर्मांतरण का यह खेल केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि एक कॉर्पोरेट मॉडल की तरह चलाया जा रहा है।
दार्शनिकों का मानना है कि सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता उसका लचीलापन और उदारता है। 33 कोटि देवताओं को पूजने वाला सनातन धर्म किसी एक ग्रंथ या दायरे में बंधा नहीं है, जबकि कट्टरपंथी सोच हमेशा एक घेरे में कैद रहने की वकालत करती है। यही कारण है कि कट्टरपंथी तत्वों को सनातन की यह व्यापकता हजम नहीं होती और वे इसे कमजोरी बताकर दुष्प्रचार करते हैं।
सोशल मीडिया पर फैल रहे इन दावों के विपरीत, जमीनी आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। काशी विश्वनाथ, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन जैसे तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या में 500% से 1000% तक की भारी बढ़ोतरी हुई है। यह स्पष्ट करता है कि सनातनी अपनी जड़ों से पहले से कहीं अधिक मजबूती से जुड़े हैं।
इन सभी गतिविधियों के पीछे एक साझी रणनीति दिखाई देती है। चाहे वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हो, तथाकथित पत्रकार हो या कॉर्पोरेट धर्मांतरण का मास्टरमाइंड—इनके मकसद और शब्दावली में एक अजीब समानता है। इन सबके वैचारिक तार पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथियों से जुड़ते नजर आते हैं। इनका एक ही लक्ष्य है—भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता को तोड़ना।
समय आ गया है कि इन बहुरूपियों के कुतर्कों और फर्जी नैरेटिव को पहचाना जाए। इनका प्रोपेगेंडा केवल एक भ्रम है, जिसे देश के जागरूक नागरिक अपने विवेक और सनातन की मजबूत नींव से ही परास्त कर सकते हैं।
*#DNAमित्रों | धर्मांतरण रैकेट बेनकाब,रील प्रोपेगेंडा एक्टिव...खाटू श्याम को लेकर अफवाह क्या फैलाई जा रही?
— Zee News (@ZeeNews) April 13, 2026
हिंदुओं के खिलाफ नये प्रोपेगेंडा का DNA टेस्ट#DNA #DNAWithRahulSinha #KhatuShyam #SanatanDharma @RahulSinhaTV pic.twitter.com/wxFvSgxL75
साकिब हुसैन: मजदूरी का दर्द और मां के गहनों की चमक, गोपालगंज एक्सप्रेस ने IPL में मचाई तबाही
नोएडा में न्यूनतम वेतन की आग: सड़कों पर उतरे मजदूर, क्यों बार-बार दिया जा रहा गुरुग्राम का उदाहरण?
क्या योगी और ब्रजेश पाठक के बीच सब ठीक है? डिप्टी सीएम ने तोड़ी चुप्पी
आशा भोसले को श्रद्धांजलि देना पड़ा भारी, पाकिस्तान में टीवी चैनल पर गिरी गाज
वानखेड़े में मायूसी: रोहित शर्मा का दर्द देख छलका रितिका का दुख, मुंबई इंडियंस को झेलनी पड़ी हार
15 युद्धपोत, F-35 और घातक घेराबंदी: ईरान को घुटनों पर लाने के लिए अमेरिका का मास्टरस्ट्रोक
SRH vs RR: टॉस जीतकर राजस्थान ने चुनी गेंदबाजी, रियान पराग की कप्तानी में बड़े बदलाव
वो मॉन्स्टर है... : रजत पाटीदार की तूफानी बल्लेबाजी देख इरफान पठान ने दिया बड़ा बयान
होमवर्क नहीं किया तो बच्ची ने दिया ऐसा बहाना, सुनकर हंसी नहीं रोक पाएंगे आप!
आशा भोसले को अंतिम विदाई: दादी को खोकर बिलख पड़ीं पोती जनाई, तब्बू के गले लगकर फूट-फूटकर रोईं