बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन? चिराग पासवान ने तोड़ी चुप्पी, नई सरकार का फॉर्मूला हुआ लीक
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बिहार की राजनीति इस वक्त एक निर्णायक मोड़ पर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद से ही पटना की गलियों में यह सवाल हर किसी की जुबान पर है कि आखिर अगला सीएम कौन होगा? इस बीच, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के नाम की चर्चा ने जोर पकड़ लिया था, लेकिन अब खुद चिराग ने इस पर बड़ा बयान देकर सस्पेंस खत्म करने की कोशिश की है।

मैं सीएम की रेस में नहीं: चिराग पासवान

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दिल्ली में स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं। उन्होंने कहा, मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि मैं इस रेस में कहीं नहीं हूं। चिराग के अनुसार, बिहार में मुख्यमंत्री का चेहरा बदलेगा, लेकिन सरकार चलाने का फॉर्मूला और गठबंधन की संरचना वही रहेगी जो पहले तय की गई थी। उन्होंने साफ किया कि नए नेता का चयन एनडीए के सभी विधायकों की सहमति और नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में ही होगा।

14 अप्रैल को बड़ा खेला होने की तैयारी

बिहार के सियासी कैलेंडर में 14 अप्रैल की तारीख बेहद अहम हो गई है। माना जा रहा है कि खरमास खत्म होते ही सत्ता का हस्तांतरण होगा।

जेडीयू की नई रणनीति: पहली बार डिप्टी सीएम का दांव

सूत्रों के अनुसार, सरकार के नए पावर-शेयरिंग एग्रीमेंट में जेडीयू को पहली बार डिप्टी सीएम के पद से संतोष करना पड़ सकता है। चर्चा है कि जेडीयू के खाते में दो डिप्टी सीएम के पद और विधानसभा अध्यक्ष का पद जा सकता है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को किसी बड़ी भूमिका में ला सकते हैं, ताकि पार्टी की कमान सुरक्षित रहे।

बीजेपी का गेम चेंजर कौन?

पटना में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े की मौजूदगी में होने वाली बैठक निर्णायक साबित होगी। ऐसी संभावना है कि बीजेपी इस बार किसी युवा और नए चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर सकती है। मंत्रिमंडल से कई पुराने दिग्गजों की छुट्टी और ऊर्जावान चेहरों को शामिल करना बीजेपी की नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

विपक्ष का कटाक्ष: रिटायरमेंट की साजिश

इधर, विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार के इस कदम पर तीखे हमले किए हैं। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे नीतीश की मजबूरी बताया है। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी ने नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजकर उन्हें राजनीतिक रूप से रिटायर करने की साजिश रची है।

फिलहाल, पूरा राज्य 14 अप्रैल का इंतजार कर रहा है, जब गठबंधन की बैठक में यह तय होगा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नया चेहरा किसका होगा। यह बदलाव केवल एक नाम बदलने तक सीमित नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

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