नई दिल्ली: अंतरिक्ष के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। NASA का ओरियन स्पेसक्राफ्ट इंटीग्रिटी , चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर शनिवार, 11 अप्रैल को सुबह 5:37 बजे (IST) प्रशांत महासागर में सफलतापूर्वक उतरा। इसके साथ ही 10 दिन का ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन संपन्न हो गया। यह 1972 में अपोलो 17 के बाद चंद्रमा के लिए की गई पहली मानवयुक्त उड़ान थी।
इस मिशन के दौरान कमांडर रीड वाइज़मैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन ने न केवल चांद की परिक्रमा की, बल्कि कई नए रिकॉर्ड भी बनाए। वे पृथ्वी से 252,760 मील की दूरी तक गए, जो अपोलो 13 के रिकॉर्ड से भी 4,000 मील अधिक है।
यात्रा के दौरान 6 अप्रैल को, ओरियन चांद की ऊबड़-खाबड़ दूसरी सतह के 4,070 मील करीब से गुजरा। आधी सदी बाद किसी इंसान ने अपनी आंखों से चांद का वह हिस्सा देखा जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। इतना ही नहीं, क्रू ने गहरे अंतरिक्ष से पूर्ण सूर्य ग्रहण का दुर्लभ नज़ारा भी देखा, जिसे पहले कभी मनुष्यों ने अनुभव नहीं किया था।
मिशन का अंतिम चरण सबसे चुनौतीपूर्ण था। कैप्सूल लगभग 25,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के वातावरण में दाखिल हुआ। इस दौरान हीट शील्ड ने 5,000°F के तापमान को झेला। कमांडर वाइज़मैन ने पृथ्वी के नीले रंग को देखकर खुशी व्यक्त की। अंत में, 11 पैराशूटों की मदद से कैप्सूल 17 मील प्रति घंटे की मामूली रफ्तार से समुद्र में उतरा।
हालांकि मिशन सफल रहा, लेकिन क्रू को कुछ तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यात्रा के दौरान पीने के पानी की प्रणाली, प्रोपेलेंट वाल्व और टॉयलेट में खराबी जैसी बाधाएं आईं। इन मुश्किलों पर क्रिस्टीना कोच ने कहा कि अंतरिक्ष की गहराई तक पहुंचने के लिए असुविधाओं को सहना और जोखिम उठाना जरूरी है।
इस मिशन ने यह साबित कर दिया है कि इंसान अब गहरे अंतरिक्ष के लिए तैयार है। आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत अब अगला कदम आर्टेमिस III है, जिसमें एस्ट्रोनॉट्स पृथ्वी की कक्षा में लूनर लैंडर डॉकिंग का अभ्यास करेंगे। वहीं, 2028 में आर्टेमिस IV के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मनुष्य के कदम रखने का लक्ष्य रखा गया है।
इस ऐतिहासिक मिशन की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चांद पर स्थायी मौजूदगी का सपना अब वास्तविकता के बेहद करीब है।
Artemis II Splashdown | The Artemis II astronauts have splashed down at 8.07 pm ET, bringing their historic 10-day mission around the Moon to an end
— Republic (@republic) April 11, 2026
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