ईरान का खून से सना संदेश: इस्लामाबाद शांति वार्ता में अमेरिकी हमलों के सबूत लेकर पहुंचे प्रतिनिधि
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होने जा रही शांति वार्ता से पहले ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल अपने साथ वे सामान लेकर पहुंचा है, जो किसी भी इंसान की रूह कंपा दें।

खून से सने बैग और जूते बने दूत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबफ के नेतृत्व में पहुंचा ईरानी दल अपने विमान में उन मासूम बच्चियों का सामान लेकर आया है, जो मिनाब के तय्यबेह स्कूल में अमेरिकी हमले का शिकार हुईं। विमान की सीटों पर खून से सने बैग, जूते और बच्चों की तस्वीरें सजाई गई थीं।

ईरानी संसद अध्यक्ष गालिबफ ने सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को साझा करते हुए लिखा कि ये मासूम बच्चे ही इस शांति यात्रा में उनके सबसे अहम साथी हैं।

मिनाब हमले का दर्द

यह दिल दहला देने वाली घटना ईरान के दक्षिणी होर्मोज़गन प्रांत के मिनाब शहर में हुई थी। रिवोल्यूशनरी गार्ड बेस के पास स्थित इस स्कूल पर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल से हमला किया गया था। शुरुआती जांच में अमेरिकी सेना इसे खुफिया जानकारी की चूक बता रही है, लेकिन इस हमले में 165 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिनमें बच्चों की संख्या काफी अधिक थी।

वार्ता से पहले ही कड़ा रुख

इस्लामाबाद में हो रही इस शांति वार्ता के लिए ईरान ने सख्त तेवर अपना रखे हैं। गालिबफ का कहना है कि लेबनान में सीजफायर और ईरान की अटकी हुई संपत्तियों की रिहाई पर सहमति बनने के बावजूद उन्हें लागू नहीं किया गया। ईरानी दल में सुरक्षा, सैन्य और कानूनी विशेषज्ञों की बड़ी टीम शामिल है, जो साफ संकेत दे रही है कि वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब ईरान की शर्तें मानी जाएंगी।

ट्रंप की चेतावनी और अमेरिका का रुख

दूसरी ओर, वाशिंगटन का रुख अभी भी आक्रामक है। डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि यह वार्ता सफल होगी, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका हर हाल में खुलवाएगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर है और अमेरिका खाड़ी में अपनी शर्तों को लागू करने के लिए तैयार है।

क्या शांति संभव है?

एक तरफ शांति वार्ता की मेज सजी है, तो दूसरी तरफ मिनाब की राख और बच्चियों के खून से सने जूते इस वार्ता को और अधिक जटिल बना रहे हैं। इस्लामाबाद की यह बैठक न केवल ईरान और अमेरिका के रिश्तों की दिशा तय करेगी, बल्कि यह भी दिखाएगी कि क्या मानवीय त्रासदी को दरकिनार कर कोई कूटनीतिक समाधान निकल सकता है।

पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद पर टिकी हैं। क्या इन बच्चों के आंसू शांति का रास्ता खोल पाएंगे या यह वार्ता केवल एक और कूटनीतिक दांव बनकर रह जाएगी?

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