भारत में लोग जब सुबह की नींद से जागे, तब तक अंतरिक्ष की दुनिया में एक बड़ा इतिहास रचा जा चुका था। आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चांद का चक्कर लगाकर लौटे चार अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में उतर गए हैं। नासा का ओरियन कैप्सूल पौने छह बजे समंदर की लहरों को छूते हुए वापस धरती पर आ गया।
15 मिनट का डरावना इंतजार जब कैप्सूल पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करता है, तो घर्षण के कारण इसके जलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। नासा के वैज्ञानिकों के लिए यह समय बेहद तनावपूर्ण था। कैप्सूल की रफ्तार 25 हजार मील प्रति घंटे थी। सभी की धड़कनें थमी हुई थीं, लेकिन पैराशूट्स के खुलते ही राहत की सांस ली गई।
कितनी दूर की यात्रा? इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्रियों (जिसमें एक महिला भी शामिल हैं) ने कुल 6 लाख 90 हजार मील से ज्यादा की दूरी तय की। यह 10 दिनों का एक चुनौतीपूर्ण मिशन था, जिसने भविष्य में चांद पर मानव बस्तियां बसाने की उम्मीदों को पंख दिए हैं।
समंदर ही क्यों बनी पहली पसंद? अक्सर लोग सोचते हैं कि कैप्सूल को पानी में इसलिए उतारते हैं ताकि वह ठंडा हो जाए। असल कारण कुशन प्रभाव है। पानी एक प्राकृतिक गद्दे की तरह काम करता है, जो कैप्सूल को लगने वाले झटके को कम करता है। इसके अलावा, आबादी से दूर समंदर में लैंडिंग करना आपातकालीन स्थितियों के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। यह सैन डिएगो (कैलिफोर्निया) के तट से लगभग 50 मील दूर प्रशांत महासागर में उतारा गया।
वो रहस्यमयी पीले गुब्बारे क्या थे? ओरियन कैप्सूल पर लगे पीले गुब्बारे आपको खिलौने लग सकते हैं, लेकिन इनका नाम अपराइटिंग बैग्स है। ये यान के लिए सुरक्षा कवच हैं। यदि पानी में उतरने के बाद कैप्सूल पलट जाए या उल्टा हो जाए, तो ये गुब्बारे फूल जाते हैं और कैप्सूल को सीधा कर देते हैं। इससे अंदर बैठे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
यात्रियों को तुरंत बाहर क्यों नहीं निकाला जाता? स्पेस में लंबे समय तक रहने के कारण यात्रियों का शरीर गुरुत्वाकर्षण के आदी होने में थोड़ा समय लेता है। वे तुरंत चलने में अक्षम हो सकते हैं। इसीलिए, सामान्य प्रोटोकॉल के तहत पहले कैप्सूल को जहाज पर लिया जाता है या फिर हेलिकॉप्टर की मदद से उन्हें स्ट्रेचर पर बेस तक लाया जाता है। थोड़ी रिकवरी और ट्रेनिंग के बाद ही वे अपनी सामान्य स्थिति में लौट पाते हैं।
फिलहाल, इस सफल मिशन ने साबित कर दिया है कि इंसान अब चांद से वापस सुरक्षित लौटने की तकनीक में पूरी तरह माहिर हो चुका है।
Orion s main parachute has deployed. The spacecraft has a system of 11 chutes that will slow it down from around 300 mph to 20 mph for splashdown.
— NASA (@NASA) April 11, 2026
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