अमेरिका पर भरोसा नहीं, लेबनान में सीजफायर और संपत्ति की बहाली: बातचीत से पहले ईरान की दो टूक
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इस्लामाबाद में होने वाली बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता से पहले ईरान ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने साफ कहा है कि ईरान के पास बातचीत के लिए नेक नीयती (गुडविल) तो है, लेकिन उसे अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।

पीड़ितों की तस्वीरों के साथ पहुंचे गालीबाफ ईरानी स्पीकर एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचे। उन्होंने अपना संदेश भावुक अंदाज में दिया। वे अपनी फ्लाइट में मीनाब घटना के पीड़ितों की तस्वीरें अपने साथ लेकर आए। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को साझा करते हुए उन्होंने इसे अपना साथी बताया, जो दर्शाता है कि ईरान किन दर्दनाक परिस्थितियों से गुजरकर बातचीत की मेज पर बैठा है।

बातचीत की दो सख्त शर्तें गालीबाफ ने स्पष्ट किया है कि वार्ता तब तक आगे नहीं बढ़ेगी जब तक दो शर्तें पूरी नहीं होतीं:

  1. लेबनान में पूर्ण और प्रभावी सीजफायर लागू करना।
  2. अमेरिका द्वारा रोकी गई ईरान की संपत्तियों को तुरंत रिलीज करना।

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका इन शर्तों की अनदेखी करता है या बातचीत को केवल एक धोखा मानता है, तो ईरान अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करेगा।

ईरान का पुराना कड़वा अनुभव ईरानी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और सेंट्रल बैंक के गवर्नर सहित कई बड़े नीति-निर्माता शामिल हैं। गालीबाफ ने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले डेढ़ साल में दो बार ऐसा हुआ है जब बातचीत के दौरान ही ईरान पर हमले किए गए। उन्होंने दोहराया कि ईरान किसी भी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिकी टीम की अगुवाई करेंगे जेडी वेंस इस बैठक के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। उनके साथ स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर जैसी प्रमुख हस्तियां भी होंगी। वेंस ने संकेत दिया है कि यदि ईरान ईमानदार रहा, तो अमेरिका दोस्ती के लिए तैयार है। हालांकि, अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत में किसी भी प्रकार की चालाकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सीजफायर के दायरे पर फंसा पेंच वार्ता का मुख्य केंद्र अमेरिका और ईरान के बीच हुआ दो हफ्ते का अस्थाई सीजफायर समझौता है। विवाद इस बात पर है कि क्या यह समझौता लेबनान में इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों पर भी लागू होता है? अमेरिका और इजरायल का मानना है कि यह हिजबुल्ला के ठिकानों पर लागू नहीं होता, जबकि ईरान इसे समझौते का हिस्सा मानता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं कि क्या वेस्ट एशिया में जारी जंग का कोई ठोस समाधान निकल पाएगा।

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