मुख्य चुनाव आयुक्त को फांसी देने की मांग, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के बयान से मचा सियासी बवाल
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देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने CEC के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और कड़ा बयान देते हुए उन्हें फांसी देने की मांग की है। पटना में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को बिजली के खंभे से लटकाकर फांसी दी जानी चाहिए।

आतंकवादी से भी बड़े अपराधी

पप्पू यादव ने CEC पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें आतंकवादी और उग्रवादी से भी बड़ा अपराधी करार दिया। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ने गरीबों, दलितों, वंचितों और पिछड़ों के वोटों की चोरी की है। सांसद के मुताबिक, यह कृत्य संविधान का गला घोंटने और लोकतंत्र की हत्या करने के समान है, जिसके लिए उन्हें कठोरतम सजा मिलनी चाहिए।

पीएम मोदी और अमित शाह के इशारे पर काम

पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार आरएसएस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इस मामले में तत्काल प्रभाव से अभियोग चलना चाहिए। सांसद ने विपक्षी दलों से एकजुट होकर आंदोलन करने की अपील की और कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहनी चाहिए।

क्यों सवालों के घेरे में हैं CEC?

यह विवाद हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के निर्णयों पर कम से कम 14 बार अपनी असहमति दर्ज कराई है। यह आपत्तियां मुख्य रूप से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 में किए गए बदलावों से जुड़ी हैं।

चुनावी डेटा पर नियंत्रण का विवाद

आयुक्तों ने मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता जताई है। पारंपरिक रूप से मतदाता सूची की जिम्मेदारी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) की होती है, लेकिन आरोप है कि इस प्रक्रिया में उन अधिकारियों की पहुंच को सीमित किया जा रहा है। फॉर्म-6 में नए बदलावों को भी दोनों आयुक्तों ने अवैध और अनधिकृत करार दिया था।

विपक्ष हुआ लामबंद

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित पूरा विपक्ष आक्रामक मुद्रा में है। राहुल गांधी ने भी पूरे मामले को वोट चोरी करार देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष अब सुप्रीम कोर्ट से इन फैसलों की न्यायिक जांच और आयोग के कामकाज में पारदर्शिता की मांग कर रहा है।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे इन सवालों ने न केवल संवैधानिक संस्था की साख पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है, बल्कि इसे आगामी चुनावों के लिए एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में तब्दील कर दिया है।

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