सत्य निकेतन हादसा: केजरीवाल सरकार पर बरसे दिलीप घोष, पूछा- जब सरकार आपकी थी, तब जांच क्यों नहीं कराई?
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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हाल ही में हुई इमारत गिरने की दुखद घटना ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस हादसे में 6 लोगों की मौत के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

दिलीप घोष का कड़ा सवाल पश्चिम बंगाल के नेता दिलीप घोष ने इस घटना पर दुख जताते हुए केजरीवाल सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। घोष ने पूछा कि जब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार थी, तब इस जर्जर इमारत की जांच क्यों नहीं कराई गई? उन्होंने जोर देकर कहा कि इमारत 40-50 साल पुरानी है, जबकि मौजूदा सरकार को सत्ता में आए अभी केवल डेढ़ साल हुआ है। ऐसे में केजरीवाल का अब सरकार पर सवाल उठाना बेतुका है।

हादसे की भयावहता सत्य निकेतन की तंग गली में स्थित यह पांच मंजिला इमारत एक बॉयज हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे के समय बिल्डिंग के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था, जिसे घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है। दिल्ली एम्स ने इस दुर्घटना में 6 लोगों की मौत की पुष्टि की है।

मालिक पर शिकंजा पुलिस प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए इमारत के मालिक हरिराम बंसल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए गुरुग्राम सहित कई ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

राहुल गांधी पर निशाना इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी केवल सवाल उठाना जानते हैं, लेकिन उनके पास खुद के शासित राज्यों में हो रही घटनाओं का कोई जवाब नहीं होता।

हुमायूं कबीर मामले पर स्पष्टीकरण हुमायूं कबीर पर हुए हमले के बारे में पूछे जाने पर दिलीप घोष ने भाजपा का बचाव किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को अंडे फेंकने जैसे निचले स्तर के कामों की जरूरत नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग ऐसी हरकतें कर रहे हैं, उन्हें अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ेगा और उन्हें अपना अतीत एक बार जरूर देखना चाहिए।

फिलहाल, इस मामले ने दिल्ली में अवैध रूप से चल रहे पीजी और हॉस्टल्स की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी असुरक्षित पीजी में छात्रों को रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दिल्ली हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई होनी है।

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