सत्य निकेतन हादसा: क्या नेताओं और PG मालिकों की सांठगांठ ने ली 7 छात्रों की जान?
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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक जर्जर इमारत के ढहने से हुए भीषण हादसे ने पूरे प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस दुखद घटना में 7 छात्रों की मौत की खबर है, जबकि 12 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। मलबे में अभी भी कई और लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

3 साल पुरानी चेतावनी, फिर भी सबक नहीं यह पहली बार नहीं है कि दिल्ली में कोई इमारत ढही हो। महज 3 साल पहले, इसी जगह से 50-70 मीटर की दूरी पर एक और बिल्डिंग गिरी थी, जिसमें दो मजदूरों की मौत हुई थी और एक दर्जन लोग घायल हुए थे। उस हादसे में ठेकेदार को जेल भी हुई, लेकिन प्रशासन ने उस सबक को पूरी तरह भुला दिया। नतीजतन, आज फिर एक और भयावह हादसा सामने है।

नेताओं और माफिया का अवैध गठजोड़ स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सत्य निकेतन का पूरा स्वरूप बदल चुका है। यहां नेताओं और हॉस्टल माफियाओं के बीच गहरी सांठगांठ है। कॉलोनी में करीब 80 से 90 हॉस्टल अवैध रूप से चल रहे हैं। आरोप है कि जब भी कोई हादसा होता है, तो पुलिस खानापूर्ति के लिए मकान मालिकों को परेशान करती है, ताकि उनसे अवैध वसूली की जा सके, लेकिन सुरक्षा मानकों (Safety Audits) की ओर कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।

बिल्डिंग की नींव में मौत का खेल ढही हुई इमारत के निर्माण में घोर लापरवाही बरती गई थी। बिल्डिंग का तीन तरफ से कोई सपोर्ट नहीं था। ऊपर से, पांच मंजिला इस इमारत के नीचे बेसमेंट की खुदाई की जा रही थी। भारी बारिश के दौरान जब नींव में पानी गया, तो पूरी बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह गई। बगल में चल रहे एक अन्य छात्राओं के हॉस्टल की दीवार भी अब खतरनाक रूप से खोखली हो चुकी है, जिसके बाद उसे खाली करा लिया गया है।

प्रशासन की देरी से उठाए सवाल स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस बिल्डिंग में यह हादसा हुआ, उसे हाल ही में हॉस्टल के रूप में शुरू करने की बात कही जा रही है, जबकि सच्चाई यह है कि वहां छात्र पिछले एक साल से रह रहे थे। सवाल यह है कि आखिर प्रशासन ने अपनी आंखों के सामने चल रही इन अवैध गतिविधियों की जांच क्यों नहीं की? क्या बच्चों की जान की कीमत किसी के मुनाफे से कम है?

क्या अब जागेगा तंत्र? सत्य निकेतन हादसे के बाद पुलिस ने फरार आरोपी हरिराम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक नोटिस पर्याप्त है? स्थानीय लोगों की मांग है कि हर हॉस्टल का अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट हो, बिल्डिंगों के बाहर सुरक्षा मानकों और संचालक की जानकारी का बोर्ड लगे, और सबसे जरूरी—नेताओं व हॉस्टल मालिकों के गठजोड़ को तोड़ा जाए।

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