दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार, 6 सितंबर 2026 को हुई दर्दनाक इमारत ढहने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। पांच मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह बिखर गई, जिसमें अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मलबे के नीचे दबे अन्य लोगों की तलाश के लिए राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
प्लंबर जवाहर ने पहले ही भांप लिया था खतरा हादसे के बाद एक 60 वर्षीय प्लंबर, जवाहर का बयान इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ बनकर उभरा है। जवाहर ने दावा किया है कि हादसे से लगभग एक घंटे पहले उन्होंने बेसमेंट में मजदूरों को दीवार तोड़ते हुए देखा था। उन्होंने मजदूरों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि दीवार मत तोड़ना, वरना पूरी इमारत गिर सकती है।
जवाहर के अनुसार, मजदूरों ने उनकी चेतावनी को सिरे से खारिज कर दिया। उनका दावा है कि मजदूरों ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि इमारत पूरी तरह सुरक्षित है और उसे किसी अतिरिक्त सहारे की जरूरत नहीं है। जवाहर की चेतावनी के महज 90 मिनट के भीतर ही इमारत मलबे में तब्दील हो गई।
छह महीने पहले ही जताई थी चिंता जवाहर का यह दावा और भी चौंकाने वाला है कि उन्होंने करीब छह महीने पहले भी इसी इमारत में काम किया था। उस दौरान ही उन्हें बिल्डिंग की नींव और संरचना बेहद कमजोर महसूस हुई थी। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग में कई जगहों पर सरिए बाहर निकले हुए थे, जिससे साफ जाहिर था कि ढांचा जर्जर हो चुका है। उन्होंने उस वक्त आसपास के दुकानदारों को भी इसके प्रति सचेत किया था।
बिल्डिंग मालिक पर कसा शिकंजा, LOC जारी प्रशासन ने इस लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने बंसल के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया है, ताकि वह देश छोड़कर न भाग सके। यह इमारत हॉस्टल डेज के नाम से पीजी के तौर पर चलाई जा रही थी, जहाँ बड़ी संख्या में छात्र रहते थे।
जांच के दायरे में अब क्या? फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां इस बात की गहन जांच कर रही हैं कि बेसमेंट में किस तरह का निर्माण कार्य चल रहा था और बिना सुरक्षा मानकों के दीवार क्यों तोड़ी जा रही थी। आने वाले दिनों में प्लंबर जवाहर के इन दावों को जांच का मुख्य आधार बनाया जाएगा। क्या यह महज एक दुर्घटना थी या फिर लालच में की गई आपराधिक लापरवाही? जांच पूरी होने के बाद ही इन सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
Jawahar, a 60-year-old plumber claims he saw a labourer breaking a wall in the #SatyaNiketan building and cautioned him against it.
— Hemani Bhandari (@HemaniBhandari) September 7, 2026
He said he worked in this building 6 months ago & found its condition despicable.
Death tolls now 7. pic.twitter.com/WfPXN33KzE
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