दलीप ट्रॉफी फाइनल: मोहम्मद शमी के लिए परीक्षा की घड़ी, क्या तीसरे दिन पलटेगा पासा?
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दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। पहले दो दिनों तक ईस्ट जोन के बल्लेबाजों का दबदबा रहा। कप्तान ईशान किशन की शानदार 270 रनों की पारी और टीम के कुल 708 रनों के विशाल स्कोर ने साउथ जोन के सामने पहाड़ जैसी चुनौती खड़ी कर दी है।

अब तीसरे दिन की शुरुआत के साथ ही असली मुकाबला शुरू होगा। साउथ जोन के बल्लेबाजों को रोकने और मैच पर ईस्ट जोन की पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी जिम्मेदारी अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के कंधों पर है।

शमी की वापसी की राह में अहम पड़ाव पिछले 15 महीनों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर मोहम्मद शमी के लिए यह फाइनल किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में प्रभावित करने के बाद, अब फाइनल में उनका प्रदर्शन बीसीसीआई चयनकर्ताओं की नजरों में है।

चेन्नई की पिच पर गेंदबाजों के लिए मदद के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं, जैसा कि पहले दो दिनों में मोहम्मद सिराज की गेंदबाजी के दौरान देखा गया। ऐसे में अगर शमी यहाँ विकेट चटकाते हैं, तो टीम इंडिया में उनकी वापसी का रास्ता और भी साफ हो जाएगा।

न्यूजीलैंड दौरे पर नजरें भारतीय टीम जल्द ही न्यूजीलैंड का दौरा करने वाली है। खबरों के अनुसार, बीसीसीआई के चयनकर्ता शमी की वापसी को लेकर काफी सकारात्मक हैं। अगर शमी तीसरे दिन साउथ जोन के मजबूत बल्लेबाजी क्रम—जिसमें देवदत्त पडिक्कल और तिलक वर्मा जैसे नाम शामिल हैं—को अपनी धारदार गेंदबाजी से परेशान कर पाते हैं, तो उनका न्यूजीलैंड के लिए टिकट पक्का माना जा सकता है।

100वें फर्स्ट क्लास मैच को यादगार बनाने की कोशिश यह मुकाबला शमी के करियर का 100वां फर्स्ट क्लास मैच है। वे इस ऐतिहासिक मैच को अपने प्रदर्शन से और भी खास बनाना चाहेंगे। शमी के पास रेड बॉल क्रिकेट में अद्भुत नियंत्रण है, जो उन्हें इस पिच पर भी खतरनाक बना सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि शमी ने सिर्फ गेंद से ही नहीं, बल्कि बल्ले से भी कमाल दिखाया है। जब ईस्ट जोन के विकेट लगातार गिर रहे थे, तब शमी ने 51 गेंदों में 28 रनों की संयमित पारी खेलकर टीम को 700 रनों के पार पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। पिच की बारीकियों को उन्होंने बल्ले से बखूबी समझा है, जिसका फायदा उन्हें तीसरे दिन गेंदबाजी करते समय मिल सकता है।

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