महाराष्ट्र की शैक्षिक राजधानी पुणे इन दिनों युवाओं के भारी आक्रोश का केंद्र बनी हुई है। MPSC (महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग) की परीक्षाओं में धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। ओमकारेश्वर मंदिर चौक से शुरू होकर जिला कलेक्टरेट तक निकाले गए इस विशाल मार्च ने व्यवस्था के खिलाफ गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक: भ्रष्टाचार की जड़ें यह आंदोलन मुख्य रूप से मार्च में आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर (Group-B) स्क्रीनिंग परीक्षा में हुई धांधली के बाद भड़का है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच में अब तक सात गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार लोगों में MPSC के तीन अधिकारी—अंडर-सेक्रेटरी अभिजीत लेंधवे और सहायक अनुभाग अधिकारी विश्वेश्वर नकाते व गोपाल मराठे भी शामिल हैं। पुलिस का आरोप है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया था, जिसमें एक सफल उम्मीदवार की मिलीभगत भी सामने आई है।
छात्रों की प्रमुख मांगें आंदोलनकारी छात्रों ने व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव के लिए सरकार के समक्ष स्पष्ट मांगें रखी हैं:
राजनीतिक समर्थन और नेतृत्व हालांकि यह आंदोलन पूरी तरह से छात्रों के नेतृत्व में चल रहा है, लेकिन इसे विपक्षी दलों का भी साथ मिल रहा है। विधायक रोहित पवार और विश्वजीत कदम ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों के प्रति एकजुटता जाहिर की। रोहित पवार ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सरकार की लापरवाही को दर्शाता है और इसे पूरी तरह से छात्रों का आंदोलन माना जाना चाहिए।
चेयरमैन का इनकार और सरकारी समिति का गठन भारी दबाव के बावजूद MPSC चेयरमैन विवेक भिमनवार ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि यह घटना उनके कार्यभार संभालने से पहले की है। वहीं, राज्य सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए हितधारकों से चर्चा करेगी।
फिलहाल, पुणे की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब केवल एक परीक्षा के खिलाफ नहीं, बल्कि उस खोए हुए विश्वास की बहाली की मांग है, जिस पर लाखों युवाओं का भविष्य टिका है। यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन राज्य के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।
*MPSC परीक्षांमधील पेपरफुटी आणि भोंगळ कारभाराविरोधात पुण्यात हजारो विद्यार्थ्यांनी काढलेला आक्रोश मोर्चा हा सरकारच्या अपयशाचा ढळढळीत पुरावा आहे!
— Adv Rohini Eknathrao Khadse (@Rohini_khadse) September 7, 2026
या मोर्चातील मुलं ही शेतकऱ्यांची आणि कष्टकऱ्यांची मुलं आहेत. मुलांच्या शिक्षणासाठी काहींच्या वडिलांनी जमीन विकली आहे तर काहींच्या… pic.twitter.com/rElS71grlC
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