लखनऊ: देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद की मां के सब्र का बांध अब टूट गया है। 80 वर्षीय सावित्री सक्सेना ने प्रशासन की बेरुखी से तंग आकर अपने शहीद बेटे विवेक सक्सेना को मिले शौर्य चक्र और अन्य सम्मान वापस करने की पेशकश की है। उनका कहना है कि जिस सम्मान के लिए उन्हें दो दशक से अधिक समय से अधिकारियों के आगे गिड़गिड़ाना पड़े, उसका कोई मोल नहीं है।
क्या है मामला? असिस्टेंट कमांडेंट विवेक सक्सेना 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। उनकी वीरता के लिए उन्हें शौर्य चक्र और राष्ट्रपति पुलिस पदक से नवाजा गया था। शहीद होने के बाद सरकार ने परिवार को जमीन देने और उनकी याद में एक स्मारक बनवाने का वादा किया था, लेकिन 22 साल बीत जाने के बाद भी यह वादा केवल फाइलों में ही दफन है।
निवास प्रमाण मांगने का बेतुका विवाद शहीद के भाई रंजीत सक्सेना का आरोप है कि सरकार पहले तो जमीन देने में हीलाहवाली करती रही और जब मामला थोड़ा आगे बढ़ा, तो उनसे उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होने का प्रमाण मांग लिया गया। परिवार का तर्क है कि वे लंबे समय से लखनऊ में रह रहे हैं। उन्होंने प्रशासन को वह पुरानी रसीद भी दिखाई, जिसमें 2003 में इसी पते पर सरकार ने सहायता राशि का चेक भेजा था। इसके बावजूद, निवास को लेकर पेंच फंसाकर फाइल को लटकाए रखा गया।
देरी का आलम: 21 साल बाद मिली सम्मान राशि परिवार का दर्द सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। शौर्य चक्र से जुड़ी जो सम्मान राशि उन्हें मिलनी चाहिए थी, वह भी 21 साल के लंबे इंतजार के बाद साल 2024 में नसीब हुई। बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटते हुए अब यह परिवार पूरी तरह से टूट चुका है। सावित्री सक्सेना ने अब राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि या तो उन्हें न्याय मिले, अन्यथा उनके बेटे के सम्मान वापस ले लिए जाएं।
प्रशासन की नींद और सियासत मामला तूल पकड़ने के बाद उपजिलाधिकारी ने एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर इस परिवार की व्यथा साझा करते हुए सवाल उठाया है कि क्या भाजपा सरकार शहीद के बलिदान को पूरी तरह भूल चुकी है?
अब देखना यह है कि प्रशासन की इस नई डेडलाइन का क्या नतीजा निकलता है, या यह शहीद की मां का संघर्ष अगली फाइलों में फिर गुम हो जाएगा।
*भाजपा सरकार की बेरुखी: 23 साल बाद भी न्याय के लिए भटक रही हैं शहीद की 80 वर्षीया मां!
— UP Congress (@INCUttarPradesh) September 6, 2026
वर्ष 2003 में मणिपुर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले अमर शहीद सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना (शौर्य चक्र एवं राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित) के बलिदान… pic.twitter.com/gENwvGz3Pl
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