सातवें बच्चे की माँ बनीं कोतोए हाशिमोतो: क्या बेबी बेबी अभियान से जापान के अस्तित्व को बचा पाएंगे?
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सोशल मीडिया पर एक तस्वीर ने दुनिया का ध्यान खींचा है। जापान की जानी-मानी लेखिका और पूर्व राजनीतिक उम्मीदवार कोतोए हाशिमोतो ने अपने सातवें बच्चे के जन्म के बाद हॉस्पिटल बेड से एक सेल्फी साझा की है। यह सिर्फ एक खुशी का मौका नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली देश के सबसे बड़े अस्तित्व के संकट पर सीधी चेतावनी है।

देश का वजूद महिलाओं के हाथ में हाशिमोतो का संदेश स्पष्ट है—जापान जिस तेजी से खाली हो रहा है, उसे सिर्फ महिलाएं ही बचा सकती हैं। उनका कहना है कि गिरती जन्म दर (बर्थ रेट) के इस दौर में बच्चे पैदा करना केवल व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उनके इस आह्वान ने जापान में एक नई बहस छेड़ दी है, जहाँ युवा पीढ़ी शादी और परिवार से दूरी बनाती जा रही है।

कॉस्मेटिक सर्जरी और जन्म दर का अजीब रिश्ता यह पहली बार नहीं है जब हाशिमोतो ने चौंकाने वाले सुझाव दिए हैं। इससे पहले उन्होंने सरकार से अजीबोगरीब मांग की थी। उन्होंने कहा था कि अगर सरकार जन्म दर बढ़ाने के लिए टैक्स का पैसा खर्च कर रही है, तो उसे ओव्यूलेशन टेस्ट के बजाय ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन और कॉस्मेटिक सर्जरी को हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल करना चाहिए। उनका तर्क था कि इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे वे बच्चे पैदा करने के लिए अधिक प्रेरित होंगी।

1899 के बाद सबसे डरावना दौर जापान के आंकड़े डराने वाले हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जापान में केवल 6,71,000 बच्चों का जन्म हुआ, जो पिछले साल से 15,000 कम है। यह लगातार 10वां साल है जब जन्म दर गिरी है। 1899 के बाद से यह जापान का सबसे निचला स्तर है। देश का फर्टिलिटी रेट महज 1.14 है, जबकि स्थिरता के लिए इसे 2.1 होना अनिवार्य है।

संकट की जड़: वर्कफोर्स और भविष्य का डर जापान अब बूढ़े होते देश की श्रेणी में खड़ा है। बुजुर्गों की संख्या युवाओं से कहीं अधिक है। इसका सीधा असर देश के पेंशन सिस्टम, मेडिकल सुविधाओं और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। फैक्ट्रियों और दफ्तरों में काम करने वाले युवाओं की भारी कमी है, जिससे भविष्य में सामाजिक ढांचा ढहने का खतरा पैदा हो गया है।

अपील बनाम हकीकत सरकार कई तरह के आर्थिक बोनस और योजनाएं चला रही है, लेकिन नतीजा शून्य है। महंगाई, काम के लंबे घंटे और परवरिश का भारी खर्च युवाओं के लिए सबसे बड़ी रुकावट है। ऐसे में हाशिमोतो की यह अपील क्या वाकई महिलाओं को प्रेरित कर पाएगी, या जापान का यह संकट समय के साथ और गहराता जाएगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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