ताशकंद में गूंजी पीएम मोदी की हिंदी कविता, उज्बेक बच्चों का अंदाज देख भावुक हुए प्रधानमंत्री
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उज्बेकिस्तान की अपनी हालिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद भावुक पल का अनुभव किया। ताशकंद में उज्बेक छात्रों ने पीएम द्वारा लिखी गई कविताओं का हिंदी और उज्बेक भाषा में सस्वर पाठ किया। इस दृश्य को देखकर प्रधानमंत्री भी भावुक हो गए और उन्होंने बच्चों के हिंदी उच्चारण की जमकर तारीफ की।

कविताओं के जरिए भारत का संदेश छात्रों ने पीएम मोदी की उन कविताओं को चुना, जिनमें मानवीय मूल्यों और भारत के संकल्पों का जिक्र है। एक छात्र ने कविता पढ़ी— ताकि मानवता कहीं लग न जाए कोई दाग, हिमालयी की कोख में जंगली आग लगी है... । यह कविता शांति और मानवता के संदेश को बखूबी बयां कर रही थी।

दूसरे छात्र ने भारत की आत्मनिर्भरता और संघर्ष पर आधारित कविता सुनाई। उसने पढ़ा— भारत ने सदियों के संघर्षों को झेला है। 21वीं सदी का भारत अब आत्मनिर्भर भारत के रास्ते पर कदम बढ़ा चुका है। इन पंक्तियों को सुनकर वहां मौजूद सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए।

जब भाषा को जिया जाए प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों की सराहना करते हुए कहा, मेरे लिए ये कुछ पल बेहद भावुक करने वाले रहे। मैंने जो कविताएं कुछ साल पहले लिखी थीं, उन्हें आज इन युवाओं के मुख से सुनना अद्भुत अनुभव है।

पीएम ने आगे कहा कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं है, फिर भी जिस तरह से उन्होंने भाव प्रकट किए, वह काबिले तारीफ है। ऐसा तभी संभव है जब कोई किसी भाषा को जीता है और उसमें पूरी तरह डूब जाता है।

तमिल साहित्य और तिरुक्कुरल पर चर्चा साहित्य के प्रति अपना लगाव दिखाते हुए पीएम मोदी ने वहां मौजूद लोगों से तमिल साहित्य पर भी संवाद किया। उन्होंने प्राचीन तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल का जिक्र करते हुए कहा कि यह महान रचना सैकड़ों साल पुरानी होने के बावजूद आज भी जीवन के हर क्षेत्र में प्रेरणा देने का काम करती है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग उज्बेक छात्रों की हिंदी भाषा पर पकड़ और पीएम मोदी के साथ उनके संवाद की खूब सराहना कर रहे हैं।

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