तबाही কল্পনা से परे : नेपाल बाढ़ में प्रिंसिपल की सूझबूझ से बची 1600 बच्चों की जान
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नेपाल का संकट नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आपदा में 903 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4,250 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। बचाव और राहत कार्य का आज छठा दिन है, लेकिन तबाही का दायरा इतना बड़ा है कि मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

प्रिंसिपल का साहसिक फैसला त्रिभुवन त्रिशुली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने अपनी सूझबूझ से 1600 छात्रों की जान बचाई। 26 अगस्त की उस डरावनी सुबह को याद करते हुए उन्होंने बताया, तबाही की कल्पना करना भी मुश्किल है। जैसे ही मुझे खतरे की सूचना मिली, हमने तुरंत स्कूल की घंटी बजाकर सभी को सतर्क किया और परिसर खाली करने का फैसला लिया।

पलक झपकते ही बह गया स्कूल राजेंद्र ने बताया कि स्कूल में मौजूद 900 छात्र और स्टाफ सुरक्षित पहाड़ी की ओर भागे। उन्होंने स्कूल बसों को भी तुरंत रुकवा दिया। जैसे ही एक बस ने नया पुल पार किया, पुराना पुल ढह गया। जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो उनका पूरा स्कूल बाढ़ की भेंट चढ़ चुका था। इस आपदा में एक शिक्षक संतोष परिहार के लापता होने की दुखद खबर है। अब प्रिंसिपल का लक्ष्य स्कूल को फिर से सुरक्षित स्थान पर स्थापित करना है, जिसके लिए वे मदद की अपील कर रहे हैं।

हिमालयी क्षेत्र में वॉटर बम माना जा रहा है कि यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा पर बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण आई। भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से दर्जनों घर, वाहन और बड़े पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गए। पनबिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान हुआ है। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 16 लोगों की मौत हुई है और करीब 550 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

मुर्दाघरों में जगह खत्म, सामूहिक दफन की तैयारी नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, मरने वालों में 85 सुरक्षाकर्मी और 320 विदेशी नागरिक शामिल हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि सरकारी मुर्दाघर अब शवों से भर चुके हैं। शव रखने की जगह न होने के कारण नेपाल सरकार ने अब बड़े पैमाने पर शवों को दफनाने का निर्णय लिया है। बचाव दल अभी भी मलबे और पानी में अपनों की तलाश कर रहे लोगों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण बने हुए हैं।

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