राज्यसभा में सांसद राघव चड्ढा ने चिकित्सा जगत में व्याप्त भ्रष्टाचार के एक गंभीर मुद्दे को उठाया है। उन्होंने डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच चल रहे रेफरल कमीशन और कट मनी के अनौपचारिक नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया है।
क्या है यह कट मनी का खेल? चड्ढा के अनुसार, डायग्नोस्टिक सेंटर इस कमीशन को मार्केटिंग खर्च बताते हैं, जबकि डॉक्टर इसे रेफरल कमीशन का नाम देते हैं। यह पूरा लेनदेन मरीज की जेब से वसूला जाता है, जिससे इलाज का खर्च अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में डॉक्टर मरीजों को केवल उन्हीं लैब्स में भेजते हैं, जहां उन्हें कमीशन मिलता है।
मरीजों पर पड़ता है सीधा असर सांसद ने संसद में बताया कि इस समानांतर अर्थव्यवस्था के कारण मरीजों के मेडिकल बिल में सीधे 15 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ डायग्नोस्टिक सेंटर डॉक्टरों को कमीशन के अलावा विदेश यात्राएं और अन्य सुविधाएं भी देते हैं, जिसका खामियाजा अंततः मरीज को उठाना पड़ता है।
नियमों की सरेआम धज्जियां रेगुलेशन 6.4 (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया कोड ऑफ एथिक्स) और रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स रेगुलेशन, 2023 के तहत फीस स्प्लिटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमों के उल्लंघन पर डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन 3 महीने तक निलंबित किया जा सकता है। इसके बावजूद, टियर-2 और टियर-3 शहरों में यह गोरखधंधा तेजी से पैर पसार रहा है।
मरीजों के लिए अलर्ट राघव चड्ढा ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि कोई डॉक्टर किसी विशेष लैब में ही टेस्ट कराने का दबाव बनाए या दूसरी मान्यता प्राप्त लैब की रिपोर्ट लेने से इंकार करे, तो इसे एक रेड फ्लैग के रूप में देखा जाना चाहिए। साथ ही, डॉक्टर के क्लिनिक में डायग्नोस्टिक सेंटर का प्रचार दिखना भी एक संदिग्ध संकेत है।
सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग यद्यपि चड्ढा ने माना कि अधिकांश डॉक्टर पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन चंद स्वार्थी तत्वों के कारण पूरे मेडिकल सिस्टम की विश्वसनीयता खतरे में है। उन्होंने सरकार से इस अनौपचारिक नेटवर्क को तोड़ने और मरीजों के हितों की रक्षा के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।
In Parliament today, I spoke on the “cut money” arrangement between some doctors and diagnostic centres/ pathology labs.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) August 6, 2026
Diagnostic centres call it marketing expense. Doctors call it referral commission. All gets added to Patient s hospital bill.
A silent transaction that… pic.twitter.com/Fi2CCfyGfc
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