पंखों से सुखाई जा रही सड़क, उद्घाटन के 20 दिन में पांचवीं बार मरम्मत; लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर मचा घमासान
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उद्घाटन के महज 20 दिन बाद ही सड़क के धंसने और बार-बार मरम्मत की नौबत आने ने प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सोशल मीडिया पर मरम्मत के दौरान सड़क को सुखाने के लिए बड़े पंखों का इस्तेमाल किए जाने का वीडियो वायरल हो रहा है।

अखिलेश यादव का तंज: यही है भाजपाई तरक्की

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, यह भाजपाई तरक्की की नई हवा है। उन्होंने तंज कसा कि जिस सड़क का उद्घाटन अभी कुछ दिन पहले ही हुआ हो, वह 20 दिनों में पांच बार मरम्मत मांग रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी जल्दी दम तोड़ रहे एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार में सफर करने का जोखिम आखिर कौन उठाए।

4200 करोड़ का प्रोजेक्ट और धंसती सड़क

लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था। 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस मार्ग के लिए 275 रुपये का टोल तय किया गया था। लेकिन उद्घाटन के बाद से ही इसके कई हिस्सों में सड़क धंसने और सतह खिसकने की शिकायतें मिल रही हैं। आलम यह है कि मरम्मत के चलते एक लेन बंद है और दोनों तरफ का ट्रैफिक एक ही दिशा से गुजारा जा रहा है।

NHAI का एक्शन: अधिकारियों पर गिरी गाज

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त रुख अपनाया है। निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफोटेक को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की सिफारिश की गई है। साथ ही, परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटा दिया गया है और अन्य अधिकारियों को चार्जशीट जारी की गई है। सड़क निर्माण में लापरवाही बरतने वाले तीन प्रमुख इंजीनियरों को दो साल के लिए मंत्रालय की किसी भी परियोजना से बैन कर दिया गया है।

अब टोल फ्री होगा सफर

यात्रियों की परेशानी को देखते हुए एनएचएआई ने मरम्मत कार्य पूरा होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। प्राधिकरण का कहना है कि मरम्मत का करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च निर्माण कंपनी ही उठाएगी। साथ ही, इस दौरान होने वाले टोल राजस्व के नुकसान की भरपाई भी कंपनी से ही की जाएगी।

असली वजह क्या है?

अधिकारियों का दावा है कि भारी बारिश के कारण सड़क के नीचे मिट्टी की परतों तक पानी पहुंच गया, जिससे मिट्टी की पकड़ कमजोर हुई। हालांकि, सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मामले की जांच आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों को सौंप दी है। साथ ही, लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से पूरे एक्सप्रेसवे की मजबूती का परीक्षण किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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