नेतन्याहू के खिलाफ 8 इस्लामिक देशों का मोर्चा, बोले- ट्रंप के शांति प्लान की धज्जियां उड़ा रहा इजरायल
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गाजा में जारी भीषण सैन्य कार्रवाई के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र ने एक संयुक्त बयान जारी कर इजरायल की कड़ी निंदा की है।

ट्रंप की शांति योजना पर संकट इन 8 देशों का स्पष्ट आरोप है कि इजरायल की आक्रामक सैन्य नीति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित गाजा शांति रोडमैप को पटरी से उतार रही है। क्षेत्रीय नेताओं का कहना है कि कई फिलिस्तीनी गुट इस शांति योजना को स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन नेतन्याहू का हठ समझौते के दूसरे चरण को लागू होने से रोक रहा है।

नेतन्याहू की अपनी शर्तें दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि हमास के पूर्ण हथियार डालने तक इजरायली सेना पीछे नहीं हटेगी। इजरायल ने यह भी स्वीकार किया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भेजे गए शांति मसौदे पर उन्होंने अपनी असहमति जताते हुए अलग टिप्पणियां भेजी हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन संयुक्त बयान में इन देशों ने गाजा में अस्पतालों, चिकित्सा केंद्रों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों की लगातार हो रही मौतें पूरे क्षेत्र में शांति बहाली की संभावनाओं को कमजोर कर रही हैं।

मानवीय सहायता की मांग इन आठों देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि गाजा में दवाइयों, भोजन और राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों और राहत एजेंसियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना विश्व बिरादरी की प्राथमिकता होनी चाहिए।

वेस्ट बैंक और यरुशलम पर चिंता बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि गाजा संकट को वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम के हालात से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इन देशों ने दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) का पुरजोर समर्थन करते हुए फिलिस्तीनी क्षेत्रों के विलय या वहां से लोगों के जबरन विस्थापन की किसी भी कोशिश का विरोध किया है।

शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा ट्रंप की योजना के तहत हमास को चरणबद्ध तरीके से हथियार डालने थे और बदले में इजरायल को सेना हटानी थी। लेकिन, इजरायल का पहले पूर्ण निशस्त्रीकरण का रुख और हमास का पहले सैन्य वापसी का दबाव शांति वार्ता के लिए सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या अमेरिका इस गतिरोध को खत्म करने के लिए कोई नया कूटनीतिक रास्ता निकाल पाता है या नहीं।

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