आरक्षण जारी रहेगा, जेनरेशन Z हमारे अपने; मोहन भागवत ने दिए कई बड़े संदेश
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में युवाओं के साथ एक संवाद कार्यक्रम में देश के कई संवेदनशील विषयों पर अपनी राय रखी। उन्होंने आरक्षण, छात्र आंदोलनों और नई पीढ़ी की सोच पर खुलकर बात की।

जेनरेशन Z देशद्रोही नहीं, हमारे अपने हैं मोहन भागवत ने हाल के छात्र विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि यदि जेनरेशन Z विरोध कर रही है, तो उन्हें देशद्रोही नहीं कहा जा सकता। वे हमारी ही अगली पीढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि आज के युवा तर्क चाहते हैं, वे केवल आदेश मानने वाले नहीं हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी को अपनी पीढ़ी से अधिक ईमानदार बताया।

आरक्षण पर स्थिति साफ: जब तक भेदभाव, तब तक आरक्षण आरक्षण के भविष्य पर भागवत ने कहा कि यह सामाजिक कारणों से लाया गया था। जब तक समाज में भेदभाव बना रहेगा, आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि हमें ईमानदारी से उनकी सलाह माननी चाहिए।

भागवत ने उप-वर्गीकरण का समर्थन किया ताकि आरक्षण का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जो लोग आरक्षण का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से संपन्न हो चुके हैं, उन्हें दरियादिली दिखाते हुए इसे स्वेच्छा से छोड़ देना चाहिए ताकि जरूरतमंदों को मौका मिले।

शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल सुधार की जरूरत शिक्षा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसे व्यवसाय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भागवत ने बजट में शिक्षा का हिस्सा बढ़ाकर छह प्रतिशत करने का समर्थन किया। उन्होंने जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण और फीस संरचना में सुधार बेहद जरूरी है।

पड़ोसी देशों से संबंध और मानवता चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में भागवत ने कहा कि देशों के बीच विवादों के बावजूद रिश्तों को हमेशा के लिए खत्म नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवता राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है। संघर्ष के समय देश को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन मानवीय आधार पर संबंधों को बनाए रखने का प्रयास होना चाहिए।

LGBTQIA+ और विवाह संस्था पर राय समलैंगिक विवाह के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये लोग हमारे ही समाज का हिस्सा हैं। भारतीय परंपरा सबको साथ लेकर चलने की रही है। हालांकि, विवाह को केवल सुविधा न मानते हुए इसे परिवार की संस्था से जोड़ा। उन्होंने कहा कि समाज अभी इस प्रकार के बड़े कानूनी बदलाव के लिए तैयार नहीं है, और कानून थोपने से पहले समाज की स्वीकृति महत्वपूर्ण है।

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