जयपुर बना वैश्विक शक्ति का केंद्र: BRICS बैठकों में आर्थिक भविष्य और तकनीक पर बड़ा मंथन
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वैश्विक कूटनीति का नया अड्डा बना जयपुर अगस्त का महीना जयपुर के लिए ऐतिहासिक बन गया है। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत गुलाबी नगरी अब पर्यटन के साथ-साथ कूटनीतिक और आर्थिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गई है। दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधि यहां व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल कॉमर्स और MSME सेक्टर को मजबूती देने के लिए मंथन कर रहे हैं।

सितंबर शिखर सम्मेलन की नींव सितंबर में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में BRICS शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। उससे ठीक पहले जयपुर में हो रही ये मंत्रीस्तरीय बैठकें एक प्री-समिट की तरह हैं। इन बैठकों से निकलने वाले निष्कर्ष ही आगामी शिखर सम्मेलन की मुख्य कार्ययोजना तय करेंगे।

औद्योगिक मजबूती और नवाचार पर जोर 10वें BRICS उद्योग मंत्रियों के सम्मेलन में सुदृढ़शीलता, नवाचार और सतत विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि BRICS देशों को अपनी साझा ताकत को पहचानना होगा। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक सहयोग के लिए नए रास्ते तलाश रहा है।

संयुक्त घोषणा पत्र: समझौतों का दौर बैठक का सबसे बड़ा परिणाम संयुक्त घोषणा पत्र की स्वीकृति है। इसमें MSME सहयोग, स्टार्टअप इनोवेशन फंड के साथ-साथ BRICS इन्क्यूबेटर नेटवर्क बनाने का अहम प्रस्ताव रखा गया है। फोटोवोल्टिक (सोलर) उद्योग में साझेदारी बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को आधुनिक बनाने पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनी है।

7 अगस्त: व्यापार मंत्रियों की अहम बैठक उद्योग मंत्रियों के बाद अब 7 अगस्त को 16वीं BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक होगी। पीयूष गोयल की अध्यक्षता में होने वाली इस चर्चा में वैश्विक सप्लाई चेन और डिजिटल व्यापार में सदस्य देशों की भागीदारी बढ़ाने पर फोकस रहेगा। यह बैठक भविष्य की व्यापारिक रणनीतियों के लिहाज से मील का पत्थर साबित हो सकती है।

राजस्थानी संस्कृति और मेहमाननवाजी इन कूटनीतिक बैठकों के बीच जयपुर की परंपराओं को भी वैश्विक मंच मिल रहा है। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए सिटी पैलेस में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम और गाला डिनर का आयोजन किया गया है। हवा महल और अन्य ऐतिहासिक स्थलों का दौरा कर ये प्रतिनिधि भारतीय संस्कृति और मेहमाननवाजी से रूबरू होंगे।

जयपुर में लिए गए ये फैसले न केवल भारत की वैश्विक छवि को नई ऊंचाई देंगे, बल्कि आने वाले समय में दुनिया के आर्थिक समीकरणों को बदलने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

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