आरएएस अधिकारी प्रियंका बिश्नोई की मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। अब इस मामले में जोधपुर के वसुंधरा हॉस्पिटल के संचालकों और डॉक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूट रचित दस्तावेज तैयार करने और जांच एजेंसियों को गुमराह करने के गंभीर आरोपों में नई एफआईआर दर्ज की गई है।
अदालत के आदेश पर पुलिस का बड़ा एक्शन कोर्ट के सख्त आदेश के बाद चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस ने अस्पताल के संचालक डॉ. संजय मकवाना, डॉ. रेनू मकवाना, डॉ. विनोद शैली और डॉ. जितेंद्र खेतावत के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक महेंद्र कुमार को सौंपी गई है। पुलिस अब अस्पताल के लैब रिकॉर्ड, स्याही और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच करवा रही है।
मेडिकल रिकॉर्ड में बड़ा फर्जीवाड़ा प्रियंका के पिता रक्षपाल बिश्नोई ने सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। जांच में सामने आया है कि डॉक्टरों ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड में ‘बैकडेट’ एंट्री की।
चौंकाने वाली बात यह है कि प्रियंका का ब्लड सैंपल 5 सितंबर 2024 को दोपहर 12:15 बजे लिया गया था, जिसकी रिपोर्ट दोपहर 1:30 बजे आई। लेकिन, डॉक्टरों ने रिपोर्ट आने से पहले ही दोपहर 1:05 बजे ऑपरेशन शुरू कर दिया था। एनेस्थीसिया रिकॉर्ड में भी धांधली सामने आई, जिसमें ब्लड सैंपल लेने से पहले ही रिपोर्ट देखे जाने का झूठा उल्लेख किया गया था।
अहमदाबाद में हुई थी मौत जोधपुर के अस्पताल में ऑपरेशन के बाद प्रियंका की हालत बिगड़ी, जिसके बाद परिजन उन्हें अहमदाबाद ले गए। वहां इलाज के दौरान 18 सितंबर 2024 को उनका निधन हो गया। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में उन्हें गलत दवाइयों का ओवरडोज दिया गया था, जिससे वे कोमा में चली गईं।
अस्पताल का पक्ष और मेडिकल कमेटी दूसरी ओर, अस्पताल के निदेशक डॉ. संजय मकवाना ने सभी आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि ऑपरेशन सफल रहा था। डॉ. मकवाना के अनुसार, अहमदाबाद में स्कैन के दौरान पता चला कि प्रियंका को ‘Arteriovenous Malformation’ (दिमाग की नस फटना) की समस्या थी, जिसके कारण उनकी जान गई। हालांकि, इससे पहले मेडिकल कमेटी से मिली क्लीन चिट के आधार पर पुरानी एफआईआर रद्द हो चुकी थी, लेकिन अब नए सबूतों ने केस को एक नया मोड़ दे दिया है।
एक होनहार अधिकारी का सफर बीकानेर की रहने वाली प्रियंका बिश्नोई एक मेधावी अधिकारी थीं। 2016 बैच की आरएएस अधिकारी ने बी.टेक की डिग्री हासिल की थी। वे पाली, डूंगरपुर, श्रीगंगानगर और जोधपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में असिस्टेंट कलेक्टर, एसडीओ और नगर निगम में उपायुक्त जैसे पदों पर तैनात रहीं। उनकी असमय मौत से प्रशासनिक गलियारों और बिश्नोई समाज में गहरा शोक है।
*आज यह मीठी सुरीली आवाज और शब्द, शब्द ही रह गए...😭
— SARITA_BISHNOI (@SARITA_BISHNOI2) September 18, 2024
भगवान इनकी दिवंगत आत्मा को शान्ति प्रदान करे...😭😭😭
बहन आपका motivational speech हमे और हमारी आने वाली पीढ़ी को motivate करता रहेगा...
पता नही ऐसी मीठी आवाज को किसकी नजर लग गई...
बिश्नोई समाज के लिए बहुत ही दुखद खबर 😭
।समाज… pic.twitter.com/MjRZ9XSEJe
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