क्या UPI पर लगेगा चार्ज? जयराम रमेश का बड़ा दावा- ट्रंप के दबाव में डिजिटल मार्केट खोल रही सरकार
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि यह बिल UPI को मिलने वाली वैधानिक सुरक्षा को खत्म कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तैयारी कर रही है।

UPI की मुफ्त सुविधा पर खतरा? जयराम रमेश का कहना है कि नया बिल उस कानूनी गारंटी को हटा देता है, जिसने अब तक UPI ट्रांजेक्शन को शुल्क-मुक्त रखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भविष्य में हर डिजिटल पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने का रास्ता साफ हो जाएगा, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

RBI के पास धन की कमी नहीं कांग्रेस ने सरकार के उस तर्क को खारिज किया है जिसमें कहा गया है कि UPI को टिकाऊ बनाने के लिए शुल्क जरूरी है। रमेश ने कहा कि RBI द्वारा सरकार को सालाना ट्रांसफर किए जाने वाले 2.86 लाख करोड़ रुपये के सरप्लस का एक छोटा हिस्सा ही इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के लिए काफी है। उन्होंने इसे आर्थिक तार्किकता के बजाय नीतिगत बदलाव करार दिया।

अमेरिकी कंपनियों के लिए बिछाया जा रहा रास्ता? जयराम रमेश ने इस कदम को एक बड़ी साजिश बताया। उन्होंने अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की 2026 की उस रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें UPI और RuPay के मुफ़्त होने पर आपत्ति जताई गई थी। रमेश ने पूछा, क्या पीएम मोदी अपने दोस्त डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में भारतीय बाजार को वीज़ा और मास्टरकार्ड जैसे अमेरिकी दिग्गजों के लिए खोल रहे हैं?

संसद में बिना बहस पास हुआ बिल यह विवाद तब और गहरा गया जब लोकसभा ने इस महत्वपूर्ण बिल को बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया। विपक्ष के सांसदों के हंगामे के बीच सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन कर दिया। इस संशोधन के बाद, अब सरकार नोटिफिकेशन के जरिए यह तय कर सकेगी कि किस तरह के इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर शुल्क लगेगा और कौन से मुफ्त रहेंगे।

विदेशी निवेश बनाम आम जनता का हित सरकार का कहना है कि यह बिल विदेशी पूंजी को आकर्षित करने, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए काम आसान बनाने के लिए जरूरी है। हालांकि, कांग्रेस इसे देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर विदेशी नियंत्रण और आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने की कोशिश मान रही है।

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