दीपक प्रकाश बने MLC: क्या सुप्रीम कोर्ट के डर से सुरक्षित हुई मंत्री की कुर्सी?
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बिहार की राजनीति में लंबे समय से चल रहे सस्पेंस पर आखिरकार विराम लग गया है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने आधिकारिक तौर पर बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य के रूप में शपथ ले ली है। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अपने पिता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।

सदन के सदस्य बने दीपक प्रकाश दीपक प्रकाश अब तक बिहार विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। इसके बावजूद वे सम्राट चौधरी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी नियुक्ति बीजेपी नेता देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर की गई है। सरकार के प्रस्ताव को राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने मंजूरी दी, जिसके बाद शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुई।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती बनी वजह राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद जल्दबाजी में लिया गया है। मंत्री के बिना सदन का सदस्य बने इतने लंबे समय तक पद पर रहने को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पिछले हफ्ते अदालत ने बिहार सरकार से कड़ा सवाल पूछा था कि किस संवैधानिक आधार पर एक गैर-सदस्य लंबे समय तक मंत्री बना हुआ है।

कानूनी संकट से मिली राहत इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 27 अगस्त को होनी है। लेकिन कोर्ट की अगली तारीख से पहले ही राज्य सरकार ने उन्हें एमएलसी बनाकर कानूनी संकट को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब सदन का सदस्य बनने के बाद दीपक प्रकाश की मंत्री के तौर पर कुर्सी पूरी तरह सुरक्षित हो गई है।

नवंबर 2025 से जारी था सफर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश पहली बार नवंबर 2025 में नीतीश कुमार सरकार में मंत्री बने थे। एनडीए में अपनी पार्टी (RLM) के कोटे से वे अकेले मंत्री थे। 7 मई 2026 को जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने, तब भी उन्हें कैबिनेट में बरकरार रखा गया। वे लंबे समय से बिना चुनाव लड़े या किसी सदन का हिस्सा बने ही सत्ता का अहम हिस्सा बने हुए थे।

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