मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आरक्षण और सामाजिक समरसता पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में असमानता और भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।
आरक्षण एक सुरक्षा कवच, न कि स्थायी व्यवस्था भागवत ने आरक्षण को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों के परिप्रेक्ष्य में समझाते हुए कहा कि यह आर्थिक राहत नहीं, बल्कि सदियों पुराने सामाजिक उत्पीड़न का संवैधानिक उपचार है। उन्होंने कहा कि जिस दिन समाज में पूर्ण समरसता आएगी और भेदभाव मिट जाएगा, आरक्षण की आवश्यकता खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएगी। लेकिन, जब तक वह आदर्श स्थिति नहीं आती, तब तक यह सुरक्षा कवच वंचित वर्गों के लिए अनिवार्य है।
राजनीति ने बिगाड़ा आरक्षण का स्वरूप संघ प्रमुख ने चिंता जताई कि वर्तमान में आरक्षण को समाज जोड़ने के बजाय राजनीतिक लाभ-हानि का औजार बना दिया गया है। उन्होंने कहा, आरक्षण समस्या नहीं है, बल्कि उस पर की जाने वाली राजनीति समस्या है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आरक्षण कब तक चलना चाहिए, इसका अंतिम निर्णय उसी वर्ग को लेना चाहिए जिसके लिए इसे बनाया गया है। यदि किसी का उत्थान हो गया है, तो उन्हें दूसरों को मौका देने का विचार करना चाहिए।
श्रम के सम्मान के बिना अधूरा है विकास रोजगार पर बात करते हुए भागवत ने युवाओं को सरकारी नौकरी की अंधी दौड़ से बाहर निकलने की सलाह दी। उन्होंने अफसोस जताया कि समाज में शारीरिक श्रम करने वाले, जैसे किसान और कारीगर, को उचित सम्मान नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि कागजी नोट पेट नहीं भरते, बल्कि किसान का अनाज ही पेट भरता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे उद्यमिता और स्वरोजगार को अपनाएं और छोटे माने जाने वाले कार्यों से भी बड़ी सफलता की नींव रखें।
** शिक्षा प्रणाली और दृष्टि बदलने की जरूरत** भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि बेरोजगारी का समाधान केवल सरकारी नौकरियां निकालने में नहीं है, बल्कि काम को छोटा या बड़ा समझने की मानसिकता को बदलने में है। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाए।
युवा पीढ़ी राष्ट्र-विरोधी नहीं कार्यक्रम के दौरान छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए भागवत ने कहा कि अगर नई पीढ़ी (Gen Z) सवाल उठाती है या प्रदर्शन करती है, तो उन्हें राष्ट्र-विरोधी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि वे हमारे ही अपने बच्चे हैं और उन्हें सुनने व समझने की आवश्यकता है।
#WATCH मुंबई, महाराष्ट्र: हाल ही में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्र-विरोधी कहे जाने पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, अगर Gen Z विरोध कर रहा है, तो वे राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं। वे हमारे ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं... मुझे नहीं लगता कि Gen Z ऐसी… pic.twitter.com/nTdqagGoho
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 6, 2026
पालतू कुत्ते को बचाने वाला छोटा हीरो : असम सीएम ने रिदिप के परिवार से की मुलाकात, सौंपा 5 लाख का चेक
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका: बॉम्बे हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में ठहराया दोषी
17 अगस्त तक भरें एन्यूमरेशन फॉर्म, वरना वोटर लिस्ट से कट सकता है आपका नाम
महिला एशिया कप 2026: दुबई में होगा महामुकाबला, भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत की तारीख तय
भोजपुरी बवाल: रिक्शा थामते ही फफक पड़े निरहुआ, पुरानी यादों ने रुलाया सुपरस्टार को
मां की ममता बनाम मौत का खेल: चूजों को बचाने के लिए जहरीले सांप से भिड़ गई मुर्गी
W, W, W: जिस गेंदबाज को टीम इंडिया ने किया नजरअंदाज, उसने 2 ओवर में बदल दिया मैच का नक्शा
कलयुग का क्रूर सच: पिता के अंतिम संस्कार के वक्त बेटी पूछती रही— अभी और कितनी देर लगेगी, हमें खाना खाना है
झोंपड़ी में भविष्य : मंडला के सरकारी स्कूल का वीडियो वायरल, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
83 की उम्र में भी अमिताभ का वर्कहोलिक अंदाज: 24 घंटे की नॉन-स्टॉप शिफ्ट के बाद बोले- काम नहीं करता तो नौकरी चली जाती!