मध्य प्रदेश में विकास के तमाम बड़े दावों के बीच मंडला जिले से आई तस्वीरों ने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की कलाई खोल दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने प्रशासन की कार्यशैली और सुविधाओं के खोखले दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
झोंपड़ी बनी स्कूल का कमरा वायरल वीडियो में एक प्राथमिक विद्यालय को झोंपड़ीनुमा ढांचे में चलते हुए दिखाया गया है। मंडला की सिंघानपुरी तहसील में स्थित इस स्कूल की स्थिति बेहद दयनीय है। कड़कती धूप हो या बारिश, कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को इसी अस्थायी और जर्जर संरचना के नीचे बैठकर पढ़ाई करने और मिड-डे मील खाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
विकास के दावों के बीच बदहाली राज्य सरकार लगातार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्कूलों के आधुनिकीकरण के दावे करती आई है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। आदिवासी बहुल मंडला जैसे जिलों में आज भी कई स्कूल बुनियादी सुविधाओं जैसे सुरक्षित भवन, पेयजल और शौचालयों के लिए तरस रहे हैं।
भविष्य की नींव के साथ खिलवाड़ शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव होती है। यदि शुरुआती स्तर पर ही उन्हें असुरक्षित और प्रतिकूल माहौल मिलेगा, तो उनके सीखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ना तय है। खराब मौसम के दौरान ऐसी झोंपड़ियों में पढ़ाई करना न केवल चुनौतीपूर्ण है, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है।
प्रशासन की चुप्पी और जनता की मांग इस वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि शहर के स्कूलों की तर्ज पर ही गांव के बच्चों को भी सुरक्षित और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए। क्या केवल योजनाओं के नाम पर कागजी खानापूर्ति की जाएगी या इन बच्चों को वास्तव में एक पक्की छत नसीब होगी?
अब आगे क्या? मामला सुर्खियों में आने के बाद अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या अधिकारी वास्तविकता की जांच कर जल्द ही स्कूल के लिए पक्का भवन मुहैया कराएंगे? यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर विकास की किरणें कब तक दूर-दराज के इन गावों के अंतिम छोर तक पहुंचेंगी। फिलहाल, इन बच्चों का स्कूल सुधार की बाट जोह रहा है।
Dear @theskindoctor13 , once the money is credited to your account for the above post, just sit and think about these kids of same Madhya Pradesh.
— Rohit (@Iam_Rohit_G) August 5, 2026
This a primary school for students belonging to class 1 to Class 5.
They sit together in one room and study and eat their mid day… pic.twitter.com/R9cifIF7ji
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