क्रिकेट की पिच से जैवलिन तक: नीरज चोपड़ा को पछाड़कर गोल्ड जीतने वाले रुमेश पथिरागे की अनसुनी कहानी
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जैवलिन थ्रो इवेंट के दौरान एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। भारत के ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा ने चोट से उबरते हुए शानदार वापसी की और सिल्वर मेडल अपने नाम किया, लेकिन इस बार स्वर्ण पदक श्रीलंका के 23 वर्षीय युवा खिलाड़ी रुमेश थरंगा पथिरागे के नाम रहा।

कौन हैं रुमेश पथिरागे? 21 मार्च 2003 को जन्मे रुमेश पथिरागे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 89.75 मीटर के रिकॉर्ड थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने न केवल देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि नीरज चोपड़ा जैसे दिग्गज को दूसरे पायदान पर धकेल दिया।

क्रिकेटर बनना था पहला सपना दिलचस्प बात यह है कि खेल की दुनिया में रुमेश की शुरुआत जैवलिन से नहीं, बल्कि क्रिकेट से हुई थी। स्कूल स्तर पर वे एक बेहतरीन तेज गेंदबाज के रूप में पहचाने जाते थे। अंडर-16 स्तर पर, वे 134 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करने की क्षमता रखते थे। एक स्कूल मैच में उन्होंने 5 विकेट लेने के साथ अर्धशतक भी लगाया था।

कैसे जैवलिन की ओर मुड़े? हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट में कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए उन्होंने अपना रास्ता बदलने का फैसला किया। उनके पिता, जो स्वयं एक डिस्कस और शॉटपुट खिलाड़ी थे, ने उन्हें एथलेटिक्स के लिए प्रेरित किया। 2017 में रुमेश ने पहली बार भाला उठाया। शुरुआत मात्र 30 मीटर के थ्रो से हुई, लेकिन अपनी जबरदस्त मेहनत से वे महज दो महीने में 63 मीटर के आंकड़े तक पहुंच गए।

कोच का मार्गदर्शन और सफलता रुमेश की सफलता के पीछे उनके कोच टोनी का बड़ा हाथ है। रुमेश का मानना है कि टोनी न केवल उन्हें खेल की बारीकियां सिखाते हैं, बल्कि जीवन के सबक भी देते हैं। वे हमेशा रुमेश को बेसिक चीजों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हैं।

गोल्ड जीतकर क्या बोले रुमेश? जीत के बाद रुमेश बेहद भावुक थे। उन्होंने कहा, श्रीलंका के लिए जैवलिन में गोल्ड मेडल जीतना मेरे लिए गर्व की बात है। पोडियम पर खड़े होकर अपना राष्ट्रगान सुनना मेरे जीवन का सबसे यादगार पल है।

कॉमनवेल्थ गेम्स जैवलिन फाइनल परिणाम:

इस प्रतियोगिता में भारत के लिए एक और अच्छी खबर रही कि यश वीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश के लिए डबल धमाल मचाया। रुमेश की यह कहानी साबित करती है कि अगर सही मार्गदर्शन और मेहनत हो, तो किसी भी खेल में ऊंचाई हासिल की जा सकती है।

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