सनातन पर प्रहार: कृष्ण के बाद महादेव का अपमान, आखिर कब थमेगा मौलाना जरजिस का अभद्र सिलसिला?
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सावन का पवित्र महीना चल रहा है। लाखों शिवभक्त कांवड़ लेकर महादेव की भक्ति में डूबे हैं, केदारनाथ से लेकर कैलाश तक आस्था का सैलाब उमड़ा है। ऐसे में मौलाना जरजिस अंसारी का एक विवादित बयान सामने आया है, जिसने करोड़ों हिंदुओं की आस्था को गहरी चोट पहुंचाई है।

महादेव पर आपत्तिजनक टिप्पणी से उबाल मौलाना जरजिस ने भगवान शिव को लेकर ऐसी अपमानजनक बातें कही हैं, जिन्हें दोहराना भी संभव नहीं है। इससे पहले भी उसने भगवान कृष्ण को मुस्लिम और नमाजी बताकर विवाद खड़ा किया था। अब महादेव पर निशाना साधकर उसने नफरत की अपनी हदें पार कर दी हैं।

सड़कों पर उतरा शिव भक्तों का आक्रोश इस बयान के बाद देश के कई हिस्सों में शिव भक्तों का गुस्सा फूट पड़ा है। विभिन्न हिंदू संगठनों और संतों ने मौलाना जरजिस के पुतले फूंके हैं और उसकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या जरजिस जैसे लोग समाज में जानबूझकर दंगा और अशांति फैलाना चाहते हैं?

अपराधी इतिहास और बुलंद हौसले मौलाना जरजिस कोई नया नाम नहीं है। उसका आपराधिक रिकॉर्ड बेहद गंभीर रहा है। वर्ष 2016 में उस पर एक महिला को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने, उसे ब्लैकमेल करने और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज हुआ था।

2022 में वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उसे इस मामले में 10 साल की सजा सुनाई थी। पैरोल पर बाहर आते ही वह फिर से अपनी पुरानी आदतों पर उतर आया और सनातन धर्म के प्रतीकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

कानूनी घेरे में मौलाना मौलाना जरजिस के खिलाफ कानून का शिकंजा कस रहा है। लखनऊ के हजरतगंज थाने में उसके खिलाफ FIR दर्ज है। इसके अलावा, पानीपत कोर्ट ने भी उसे 12 अगस्त को पेश होने का नोटिस जारी किया है। उत्तर प्रदेश के इटावा, बदायूं, बरेली, वाराणसी और कानपुर समेत कई जिलों में उस पर 10 से 12 मुकदमे दर्ज हैं।

बड़ा सवाल: कौन दे रहा संरक्षण? सवाल यह है कि एक सजायाफ्ता अपराधी बार-बार खुलेआम धार्मिक भावनाओं को कैसे भड़का सकता है? आखिर उसे इतनी हिम्मत कौन दे रहा है कि वह कानून और आस्था दोनों को चुनौती दे रहा है? संतों और आम जनता की मांग है कि जरजिस के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में सनातन धर्म की ईश-निंदा करने वालों को सबक मिल सके।

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