जंतर-मंतर के बाद अब रांची का मैदान दहला: जेपीएससी-जेएसएससी घोटाले के खिलाफ छात्रों का आमरण अनशन
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चला छात्र आंदोलन 25 जुलाई को समाप्त हुआ था। इसे खत्म हुए अभी 8 दिन ही बीते हैं कि झारखंड की राजधानी रांची से एक बड़ी हलचल सामने आई है। रांची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह स्टेडियम में सैकड़ों छात्र पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर डटे हैं। उनकी यह लड़ाई झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ है।

भविष्य के साथ खिलवाड़ कब तक? प्रदर्शनकारी छात्रों का दर्द और आक्रोश साफ देखा जा सकता है। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में हुई अधिकांश भर्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। छात्रों का कहना है कि उनकी सालों की मेहनत उन लोगों की भेंट चढ़ जाती है, जो पैसों या गलत पहुंच के दम पर नौकरी हासिल कर लेते हैं।

आंदोलन कर रहे युवाओं की मांग है कि सिर्फ खानापूर्ति के लिए जांच न की जाए। उनकी मांग है कि धांधली से नौकरी पाने वालों की नियुक्ति तुरंत रद्द हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी परीक्षा प्रणाली की पवित्रता से खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।

पारदर्शी भर्ती की मांग छात्रों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि भविष्य में आयोजित होने वाली सभी JPSC और JSSC परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी हों। उनका मानना है कि जब तक चयन प्रक्रिया में धांधली नहीं रुकेगी, तब तक योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जाता रहेगा और सरकारी व्यवस्था से उनका भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

आंदोलन का नया केंद्र बना जयपाल सिंह स्टेडियम रांची का जयपाल सिंह स्टेडियम इस समय केवल एक खेल का मैदान नहीं, बल्कि झारखंड की भर्ती व्यवस्था के खिलाफ उठ रही युवा क्रांति का केंद्र बन चुका है। मैदान पर बढ़ती छात्रों की संख्या यह बताने के लिए काफी है कि यह लड़ाई अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के युवाओं के सम्मान और उनके भविष्य की निर्णायक लड़ाई बन चुकी है।

सरकार की चुप्पी पर सवाल मौके पर मौजूद छात्रों के चेहरों पर निराशा के साथ एक उम्मीद भी दिख रही है—उम्मीद इस बात की कि शायद अब सरकार की नींद खुलेगी। फिलहाल, सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और संबंधित जांच एजेंसियां इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाती हैं। छात्र साफ कह चुके हैं कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से इस मामले में क्या ठोस कदम उठाया जाता है।

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